देश की राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में टमाटर की कीमतें 80 रुपये के ऊपर चली गईं हैं, जिसको कंट्रोल करने के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सस्ते यानी रियायती टमाटरों की बिक्री शुरू कर दी है. टमाटर की कीमतें कम करने के लिए इस योजना को जल्द ही देश के अन्य हिस्सों में भी बढ़ाया जाएगा. यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि पिछले महीने आए चक्रवात मोन्था से फसल को बड़ा नुकसान हुआ और कीमतें तेजी से बढ़ गईं. यह जानकारी मामले से जुड़े दो सरकारी अधिकारियों ने दी.
आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे बड़े टमाटर उगाने वाले इलाकों में चक्रवात के असर से सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके कारण दिल्ली के कई इलाकों में दुकानों की कीमतें 80 रुपये प्रति किलो से ऊपर चली गईं. उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (NCCF) के जरिए जनता ब्रांड के टमाटर 52 रुपये प्रति किलो में बेचने का फैसला किया है. अधिकारियों ने बताया कि यह कदम संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले उठाया गया है, जो 1 से 19 दिसंबर तक चलेगा.
हाल के दिनों में दिल्ली, हरियाणा और यूपी में सप्लाई कम होने से थोक और खुदरा—दोनों कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. एक अधिकारी ने बताया कि चक्रवात मोन्था की भारी बारिश और तेज हवाओं से फसल खराब हुई, जिसके बाद दाम अचानक बढ़ गए. आने वाले दिनों में टमाटरों की यह रियायती बिक्री अन्य राज्यों में भी शुरू की जाएगी. नवंबर में सरकार का यह पहला बाजार में दखल है. आमतौर पर ऐसा कदम अगस्तअक्टूबर के बीच उठाया जाता है, जब मानसून की वजह से टमाटर की कमी बढ़ जाती है.
टमाटर का उत्पादन
कृषि मंत्रालय के 2024-25 के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, देश में टमाटर का उत्पादन पिछले साल के 21.32 मिलियन टन से घटकर 19.46 मिलियन टन रहने का अनुमान है. आंध्र प्रदेश और कर्नाटक का योगदान क्रमशः 16% और 10% है. आंध्र के मदनपल्ले और कर्नाटक के कोलार-चिक्काबल्लापुर जैसे बड़े बाजारों में भी फसल के नुकसान और आवक कम होने की रिपोर्ट है. दूसरे अधिकारी ने कहा, हम सभी जरूरी सामानों की कीमत पर लगातार नज़र रखते हैं और जरूरत पड़ने पर कदम उठाते हैं. इस समय आम तौर पर टमाटरों की सप्लाई अच्छी रहती है, लेकिन फसल खराब होने से कमी आ गई है और बाजार में उथल-पुथल मच गई है. जनता टमाटर की बिक्री तब तक जारी रहेगी जब तक कीमतें 4050 रुपये किलो की सीमा में नहीं आ जातीं. NCCF दिल्ली NCR में कई जगहों पर प्याज भी 15 रुपये प्रति किलो में बेचेगा. मंत्रालय से इस बारे में ईमेल पर सवाल पूछे गए, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया. टमाटर मोबाइल वैन और स्टॉल के जरिए कृषि भवन, बाराखंभा रोड, खारी बावली, साकेत, मालवीय नगर, पटेल चौक, आर.के. पुरम, नेहरू प्लेस, रोहिणी, द्वारका और नोएडा जैसे स्थानों पर बेचे जाएंगे.
सब्सिडी में टमाटर
2024 में सरकार ने टमाटर के बढ़ते दामों को रोकने के लिए दो बार दखल दिया था. जुलाई में, जब कीमतें 80100 रुपये किलो तक पहुंच गई थीं, तब रियायती टमाटर 60 रुपये किलो पर बेचे गए. दूसरा कदम अक्टूबर में उठाया गया, जब बाजार का औसत दाम 100 रुपये किलो था और सब्सिडी वाले टमाटर 65 रुपये किलो में दिए गए. 2023 में तो दाम 250 रुपये किलो तक चले गए थे, तब सरकार को टमाटर 90 रुपये किलो पर बेचना पड़ा और बाद में दर घटाकर 40 रुपये किलो कर दी थी. कर्नाटक के कोलार जिले के मुलबागल के किसान सदाशिव हलूर ने बताया कि हमने अच्छी फसल की उम्मीद की थी, लेकिन बारिश ने नुकसान कर दिया. लागत पहले से बढ़ गई है, इसलिए छोटे किसानों के लिए कर्ज चुकाना मुश्किल होगा. राज्य के एक बागवानी अधिकारी के मुताबिक, बेमौसम बारिश से करीब 765 हेक्टेयर फसल खराब हुई है, जबकि पूरे राज्य में टमाटर 39,474 हेक्टेयर में उगाए जाते हैं.
कृषि नीति विशेषज्ञ और SFAC के पूर्व MD प्रवेश शर्मा ने कहा, टमाटर सबसे ज़्यादा उतारचढ़ाव वाली सब्ज़ी है. आंध्र या कर्नाटक में थोड़ी भी दिक्कत हो जाए तो उत्तर भारत में खुदरा दाम बढ़ जाते हैं. यह कदम थोड़े समय के लिए कीमतें संभालेगा, लेकिन असली समस्या है कि हम कुछ गिनेचुने इलाकों पर ज्यादा निर्भर हैं. जब तक देश भर में छोटे-छोटे उत्पादन क्षेत्रों और बेहतर भंडारण सुविधाओं पर निवेश नहीं होगा, तब तक यह समस्या हर साल दोहराई जाएगी.
दिल्ली में टमाटर की कीमतें
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में 25 नवंबर को टमाटर की खुदरा कीमत 80 रुपये किलो थी, जो पिछले साल की 48 रुपये से 66.7% ज्यादा है. कोलकाता में दाम 52 रुपये से बढ़कर 73 रुपये किलो (40.4% ज्यादा) और चेन्नई में 40 रुपये से बढ़कर 75 रुपये किलो (87.5% ज्यादा) हो गए. हैरानी की बात यह है कि दुकानों पर दाम बढ़े हैं, लेकिन थोक बाजार में कीमत लगभग वही रही है. 25 नवंबर को थोक कीमत 4,182 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो पिछले साल से सिर्फ 0.53% ज्यादा है. इससे साफ होता है कि खुदरा दुकानदारों का मार्जिन बढ़ गया है. दिल्ली विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री अभाष कुमार के मुताबिक, टमाटर का उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक में वजन 0.6% है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने से थोड़े समय के लिए असर पड़ता है, लेकिन कुल महंगाई पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता.
ICAR के पूर्व सहायक महानिदेशक बीबी सिंह ने कहा कि सरकार ने जल्दी कदम इसलिए उठाया क्योंकि टमाटर खाद्य वस्तुओं में अहम भूमिका रखता है और कीमत थोड़ी बढ़ने पर भी संसद सत्र के दौरान राजनीतिक आलोचना हो सकती है. दिसंबर में सप्लाई सामान्य होने तक सरकार बाजार पर कड़ी नजर रखेगी. हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के व्यापारी अमर ठाकुर ने बताया कि वे इस समय नासिक से टमाटर मंगा रहे हैं और सप्लाई कम है. हालांकि, अगले 2025 दिनों में दाम कम होने की उम्मीद है, क्योंकि राजस्थान और पंजाब से नए टमाटर आने लगेंगे. हिमाचल में टमाटर जून से अक्टूबर के मौसम में उगाया जाता है. देश की खुदरा महंगाई अक्टूबर में 0.25% के अब तक के सबसे कम स्तर पर आ गई, जो सितंबर में 1.44% थी और RBI के अनुमान से भी काफी कम है.



