सनातन धर्म में वर्ष में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्र को साधना, तंत्र और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति का सबसे रहस्यमय पर्व माना गया है। इस वर्ष गुप्त नवरात्र 19 जनवरी से प्रारंभ होकर 27 जनवरी तक रहेंगे। यह समय सामान्य पूजा-पाठ का नहीं बल्कि गुप्त साधना, मंत्र सिद्धि और आत्मिक उत्थान का होता है।
मान्यता है कि इन नौ रातों में मां दुर्गा अपने गुप्त रूपों में पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जो साधक पूर्ण श्रद्धा, नियम और गोपनीयता के साथ आराधना करता है, उसे असाधारण फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गुप्त नवरात्र में पूजा सार्वजनिक नहीं होती। इसी कारण इस नवरात्र को “गुप्त” कहा गया है। साधु-संत, अघोरी, तांत्रिक और सिद्ध पुरुष इन दिनों श्मशान, वन, पर्वत या एकांत स्थानों में विशेष साधनाएं करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन नौ दिनों में की गई साधना से कर्ज, रोग, भय, शत्रु बाधा, ग्रह दोष, आर्थिक संकट और मानसिक अशांति का नाश होता है।
गुप्त नवरात्र का आध्यात्मिक महत्व
गुप्त नवरात्र मुख्य रूप से मां काली, मां तारा, मां छिन्नमस्ता, मां बगलामुखी और मां त्रिपुरसुंदरी जैसी महाविद्याओं की साधना के लिए प्रसिद्ध हैं। यह समय आत्मबल, ध्यान शक्ति और आंतरिक जागरण का प्रतीक है।
मान्यता है कि गुप्त नवरात्र में किया गया मंत्र जाप कई गुना अधिक प्रभावशाली होता है और देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
गुप्त नवरात्र के 10 अचूक और सिद्ध माने जाने वाले उपाय
नवरात्र के पहले दिन पूजा स्थल में लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की स्थापना करें।
रोज ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर मौन धारण के साथ साधना प्रारंभ करें।
आर्थिक समृद्धि के लिए प्रतिदिन कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
शत्रु बाधा और मुकदमे से राहत हेतु मां बगलामुखी का ध्यान करें।
गंभीर रोग से मुक्ति के लिए दीपक में घी और कपूर मिलाकर जलाएं।
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा हेतु रात में हनुमान चालीसा का पाठ करें।
विवाह बाधा दूर करने के लिए 9 कन्याओं को भोजन कराएं।
साधना काल में झूठ, क्रोध और नशे से दूरी बनाए रखें।
घर में शांति के लिए रोज घंटी और शंख बजाएं।
अंतिम दिन मां दुर्गा से मनोकामना कहकर क्षमा याचना करें।
गुप्त नवरात्र में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- साधना का प्रचार न करें
- मांस-मदिरा से पूर्ण दूरी रखें
- अपशब्द और नकारात्मक सोच से बचें
- पूजा के नियमों में लापरवाही न करें



