रायपुर,24 सितम्बर (वेदांत समाचार): राज्य में 400 यूनिट तक 50 प्रतिशत छूट योजना का दायरा सीमित होने के बाद अब आम लोगों के लिए बिजली बिल का बोझ कम करने का एक ही तरीका बचा है और वह है घरों में सोलर प्लांट लगाना। भारी-भरकम बिजली बिल से बचने के लिए लोग पीएम सूर्य योजना के तहत घरों में सोलर प्लांट लगाने के लिए लगातार आवेदन कर रहे हैं। अब तक प्रदेश में कुल 58,500 आवेदन प्राप्त मिल चुके हैं।
इनमें से 6,500 घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं और 17,000 प्रक्रिया में है। पीएम सूर्य घर योजना के तहत एक सामान्य परिवार को तीन से पांच किलोवाट के सोलर पैनल लगाने होंगे। इसमें चार से पांच सौ वर्गफीट छत का उपयोग होता है। सामान्य परिवार में 700 से 1000 वर्गफीट की छत होती है। आधी से ज्यादा छत सोलर पैनल में खप जाती है। शेष छत का कोई दूसरा उपयोग नहीं हो पाता। इसलिए अब डीलर लोगों की डिमांड पर सात से आठ फीट की ऊंचाई पर सोलर पैनल लगा रहे हैं।
लोहे के एंगल से स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इस स्ट्रक्चर के टॉप पर पैनल लगाए जा रहे हैं। इससे नीचे के हिस्से का उपयोग किया जा सकता है। इससे लोगों की उलझनें खत्म हो गई हैं। राज्य और केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी मिलने के बाद लोगों को यह विश्वास हो गया है कि उनके सब्सिडी के लिए बहुत दिनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके बाद आवेदनों की संख्या में वृद्धि होने लगी है। पहले औसतन हर माह 1,607 आवेदन आ रहे थे और 337 प्लांट लग रहे थे। अब संख्या बढ़कर 3,906 और 744 हो गई है। लोगों के पास पीएम सूर्य घर के तहत सोलर पैनल लगाने के अलावा भारी बिजली बिल से राहत का कोई उपाय नहीं है। केंद्र सरकार पहले से एक किलोवाट पर 30 हजार, दो किलोवाट पर 60 हजार और तीन किलोवाट पर 78 हजार की सब्सिडी दे रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 18 जून को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में अतिरिक्त सब्सिडी देने का बड़ा फैसला लिया। इसके तहत राज्य सरकार अब एक किलोवाट पर 15 हजार, दो और तीन किलोवाट पर 30-30 हजार दे रही है। इस तरह एक से तीन किलोवाट तक कुल सब्सिडी क्रमशः 45 हजार, 90 हजार और 1.08 लाख रुपए हो गई है। पीएम सूर्य योजना के तहत लगातार आवेदन आ रहे हैं। आवेदनों के साथ पैनल लगाने की प्रक्रिया भी तेज की गई है। बैंक अधिकारियों से कहा गया है कि लोन के लिए आने वाले आवेदनों का जल्द निराकरण कर लोन स्वीकृत किए जाए। केंद्र और राज्य की सब्सिडी भी जल्द उपभोक्ताओं के खाते में डाली जा रही है। इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।



