बिलासपुर, 18 जनवरी (वेदांत समाचार)। सिम्स अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग ने एक बार फिर अपनी चिकित्सकीय दक्षता का परिचय देते हुए 5 साल के बच्चे के जन्मजात घुटने की गंभीर समस्या का सफल ऑपरेशन किया है। यह बीमारी ‘हैबिचुअल पटेला डिस्लोकेशन’ कहलाती है, जो अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है और लगभग एक लाख बच्चों में से केवल 5 से 6 बच्चों में ही पाई जाती है।
लोरमी निवासी 5 वर्षीय गुलशन साहू को चलने-फिरने में लगातार परेशानी हो रही थी। चलते समय उसके घुटने की कटोरी बार-बार अपनी सामान्य स्थिति से खिसक जाती थी, जिससे वह सामान्य गतिविधियां भी ठीक से नहीं कर पा रहा था। परिजन उसे सिम्स अस्पताल के आर्थोपेडिक ओपीडी लेकर पहुंचे, जहां असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय घिल्ले ने उसकी विस्तृत जांच की।
एक्स-रे और एमआरआई जांच के बाद बच्चे में ‘हैबिचुअल पटेला डिस्लोकेशन’ की पुष्टि हुई। चिकित्सकों के अनुसार यह एक जन्मजात विकृति है, जिसमें घुटने की कटोरी को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों का संतुलन बिगड़ा होता है। एक ओर की मांसपेशियां अत्यधिक कसी हुई होती हैं, जबकि दूसरी ओर की मांसपेशियां ढीली रहती हैं, जिसके कारण पटेला अपनी जगह पर स्थिर नहीं रह पाती और बार-बार खिसक जाती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बेन को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद 29 दिसंबर को बच्चे की जटिल सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान घुटने की कटोरी को स्थिर करने के लिए एक ओर की मांसपेशी को टाइट किया गया और दूसरी ओर की मांसपेशी को ढीला किया गया। मेडिकल पब्लिकेशन में वर्णित उन्नत तकनीकों के अनुसार सर्जरी में VMO प्लास्टी और क्वाड्रिसेप्स Z-लेंथनिंग पद्धति का उपयोग किया गया।
सफल ऑपरेशन के बाद बच्चे की घुटने की कटोरी पूरी तरह स्थिर हो गई है और अब वह सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम है। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि यह पूरी सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निशुल्क की गई, जिससे बच्चे के परिजनों को किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा।
इस सफल ऑपरेशन टीम में आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बेन, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय घिल्ले, डॉ. अविनाश अग्रवाल और डॉ. प्रवीन द्विवेदी शामिल रहे। वहीं निश्चेतना विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. मिल्टन और डॉ. श्वेता कुजूर ने महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कीं। सिम्स अस्पताल की इस उपलब्धि से क्षेत्र के मरीजों को उच्चस्तरीय और सुलभ चिकित्सा सेवाओं का भरोसा और मजबूत हुआ है।



