कोरबा, 08 जनवरी (वेदांत समाचार)। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के दीपका क्षेत्र में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक ओर जहां मुख्य सार्वजनिक मार्ग पर आम ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार और कथित तौर पर बल प्रयोग की शिकायतें मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर खदान के भीतर करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति की चोरी पर CISF की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार श्रमिक चौक, जो रेंकी, सुवाभोड़ी, चैनपुर, हरदीबाजार सहित दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है, वहां से गुजरने वाले ग्रामीणों को CISF जवानों द्वारा बार-बार रोके जाने, पूछताछ के नाम पर परेशान करने और अपमानजनक व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आम नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है, जिससे आवागमन बाधित हो रहा है। इसका सीधा असर स्कूली बच्चों, मरीजों और रोज़मर्रा के काम से आने-जाने वाले मजदूरों पर पड़ रहा है।
इधर दूसरी ओर दीपका खदान के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों और जागरूक नागरिकों का दावा है कि खदान क्षेत्र से बड़े पैमाने पर डीजल चोरी, मशीनी कबाड़ और लोहे की सामग्री की तस्करी लगातार जारी है। मशीनों और स्टोरेज टैंकों से डीजल निकाले जाने, कीमती उपकरणों और अन्य सामग्रियों के गायब होने की घटनाएं आम हो गई हैं, जबकि इन्हीं संसाधनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF पर है।

ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी मिलीभगत के इतनी संगठित और बड़े पैमाने पर चोरी संभव नहीं है। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि खदान में चल रहे इस गोरखधंधे को मौन संरक्षण प्राप्त है। सुरक्षा के नाम पर तैनात बल की भूमिका अब आम जनता के उत्पीड़न और खदान में भ्रष्टाचार से जोड़कर देखी जा रही है।
क्षेत्रवासियों ने SECL प्रबंधन और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि श्रमिक चौक पर ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले CISF जवानों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, खदान के भीतर हो रही संगठित चोरी की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा आम नागरिकों के लिए सार्वजनिक मार्ग पर निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



