Vedant Samachar

‘यूक्रेन से जंग का अंत चाहते हैं पुतिन’, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की रूसी राष्ट्रपति से बैठक पर ट्रंप का बयान

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वॉशिंगटन ,04 दिसंबर । राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि यूक्रेन शांति योजना पर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ ‘बहुत अच्छी’ बातचीत हुई। इस बातचीत में यह आभास हुआ है कि पुतिन जंग खत्म करना चाहते हैं।

ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, पुतिन की कल जैरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के साथ बहुत अच्छी बैठक हुई। इस बैठक से क्या (परिणाम) निकलकर आएगा, मैं बता नहीं सकता, क्योंकि इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति जरूरी है। ट्रंप ने कहा, उनकी (व्लादिमीर पुतिन) की इच्छा है कि जंग खत्म हो जाए, यही बात वे लोग बताकर आए हैं।

वार्ता पर क्रेमलिन ने क्या कहा?
हालांकि, क्रेमलिन के वरिष्ठ सलाहकार यूरी उशाकोव ने बुधवार को कहा कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच यह सबसे लंबी और गहरी बातचीत थी। लेकिन इसमें जमीन से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने शांति के संभावित तरीकों पर बातचीत की। लेकिन कई बड़े विवाद अभी भी सुलझे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि बातचीत देर रात तक चलती रही।

उशाकोव ने पुष्टि की कि अमेरिकी पक्ष ने नए प्रस्ताव रखे। लेकिन यूक्रेन की जमीन से जुड़े मुद्दों पर अभी भी बड़ी अड़चनें बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि रूस के वरिष्ठ अधिकारी इस बातचीत के दौरान मौजूद थे, जिसमें निवेश किरील दिमित्रिएव भी शामिल थे। बैठक में युद्ध खत्म करने के विकल्पों पर चर्चा हुई।

पूरी तरह गोपनीय थी बातचीत: यूरी उशाकोव
उशाकोव ने जोर देकर कहा कि बातचीत पूरी तरह गोपनीय थी। हमने तय किया है कि बातचीत की असली बातें बाहर नहीं बताई जाएंगी। उनके मुताबिक, अभी तक कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई है। लेकिन कूटनीतिक बातचीत जारी है। क्रेमलिन के सलाहकार ने यह भी कहा कि पुतिन ने विटकॉफ को कुछ अहम राजनीतिक संदेश सीधे राष्ट्रपति ट्रंप तक पहुंचाने को कहा है। उन्होंने कहा, वह अपनी रिपोर्ट ट्रंप को देंगे और फिर हमसे संपर्क करेंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच आगे भी बातचीत होगी।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात से पहले पुतिन ने शांति प्रक्रिया में यूरोप की भूमिका की आलोचना की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय देशों ने ऐसे प्रस्ताव भेजे हैं, जिनका एक ही मकसद है- पूरी शांति प्रक्रिया को रोकना।

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