नई दिल्ली,31 जनवरी । ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ताजा अध्ययन ने दुनिया को एक डरावनी तस्वीर दिखाई है। अगर वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया – जो अब वैज्ञानिकों के अनुसार काफी संभावित है – तो 2050 तक दुनिया की लगभग आधी आबादी (करीब 3.79 अरब लोग) अत्यधिक खतरनाक गर्मी का सामना करेगी।
यह संख्या 2010 के 23% (1.54 अरब) से बढ़कर 41% तक पहुंच सकती है। एक जर्नल में प्रकाशित हुआ है, बताता है कि पेरिस समझौते की 1.5 डिग्री की सीमा पार करने से पहले ही ज्यादातर प्रभाव दिखने लगेंगे। शोधकर्ताओं के अनुसार, गर्मी का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है, और अनुकूलन के उपायों को अभी से लागू करना होगा।



