Vedant Samachar

SIR का मुद्दा लेकर दिल्ली जायेंगी ममता बनर्जी, भाजपा विरोधी दलों के नेताओं से करेंगी मुलाकात

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Mamata Banerjee: तृणमूल कांग्रेस पहले ही ये चेतावनी दे रखी है कि अगर एक भी वैध मतदाता का नाम छूट गया तो वे आंदोलन को दिल्ली ले जाएंगे.

Mamata Banerjee: कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली जा रही है. ममता बनर्जी ने खुद इसकी जानकारी राजभवन में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान अपने करीबी लोगों को दी है. ममता बनर्जी ने बताया कि वह दिल्ली जा रही हैं. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में बजट पेश करेंगी. इससे पहले, केंद्र ने मंगलवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. हालांकि ममता बनर्जी के इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद नहीं है. वैसे ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे की तारीख भी अभी तय नहीं हुई है. कुछ लोगों का कहना है कि ममता संसद के सत्र के दौरान दिल्ली आ सकती हैं.

राष्ट्रीय स्तर पर उठायेंगी SIR का मुद्दा

ममता के दिल्ली प्रवास के दौरान SIR का मुद्दा राष्टीय स्तर पर एक बार फिर उठ सकता है. ममता बनर्जी की मुलाकात भाजपा विरोधी दलों के नेताओं से होने की संभावना है. कुछ लोगों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने पर ही ममता दिल्ली जा सकती हैं. ममता जब भी जाएंगी, उनका मुख्य उद्देश्य एक ही होगा – अखिल भारतीय स्तर पर एसआईआर के संबंध में राज्य में हो रही गतिविधियों को उजागर करना. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राजनीतिक हमले को और तेज करना. कई लोगों का मानना ​​है कि तृणमूल दिल्ली जाकर इस अंतर को और भी मजबूत करना चाहती है. इससे अखिल भारतीय स्तर पर भाजपा विरोधी खेमे में तृणमूल कांग्रेस का कद और स्वीकार्यता और बढ़ेगी. अगर ममता बनर्जी स्वयं वहां जाती हैं, तो पूरे देश का ध्यान उस ओर आकर्षित होगा.

SIR पर लड़ाई जारी रखेंगी ममता

ममता ने सार्वजनिक रूप से और अपने करीबी लोगों के बीच कई बार कहा है कि वह एसआईआर को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेंगी. उन्होंने कहा कि वे वोटर लिस्ट से ‘वैध’ मतदाताओं को बाहर किए जाने का विरोध करेंगी. साथ ही SIR के नाम पर जनता के एक बड़े वर्ग को परेशान करने का विरोध करेंगी. ममता बनर्जी के करीबी एक नेता के अनुसार- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने जल्दबाजी में एसआईआर प्रक्रिया शुरू कर दी है. उन्हें यह नहीं पता कि यह उल्टा असर डालेगा. लोगों को परेशान किया जा रहा है. वे असंतुष्ट हैं. उनके नाम या पद का जरा सा भी जिक्र होने पर उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है. उन्हें घंटों तक बैठाकर रखा जा रहा है. हम उन बेबस लोगों के साथ हैं. हमारे नेता उन बेबस लोगों के साथ हैं.

कई सभाओं में पार्टी दे चुकी है चेतावनी

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया 4 नवंबर को शुरू हुई. उसी दिन ममता और अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता की सड़कों पर जुलूस निकाला था. जुलूस के अंत में, ठाकुरबाड़ी के सामने हुई सभा में अभिषेक ने कहा-नेता की अनुमति से, मैं कह रहा हूं कि अगर एक भी वैध मतदाता का नाम छूट गया, तो मैं एक लाख लोगों को दिल्ली ले जाऊंगा. बाद में भी अभिषेक ने कई बार यही बात कही है. इसमें कोई शक नहीं कि अगर ममता खुद किसी आंदोलन के लिए दिल्ली जाती हैं, तो उनका प्रभाव बढ़ेगा. अमित शाह के मंत्रालय को भी विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक कदम उठाने के बारे में सोचना होगा. क्योंकि दिल्ली की पुलिस व्यवस्था शाह के केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है.

बंगाल में वोट चोरी पकड़ने का दावा

तृणमूल की ओर से लगातार इस बात को दोहराया है कि विपक्षी दलों ने बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के चुनावों के दौरान हुई ‘धांधली’ को पकड़ लिया होता, तो भाजपा चुनाव नहीं जीत पाती. विपक्ष वहां की ‘धांधली’ को पकड़ नहीं पाया. यही काम तृणमूल ने पश्चिम बंगाल में किया. उन्होंने वोटर लिस्ट से नाम हटाने या फर्जी नाम जोड़ने के ‘खेल’ को पकड़ लिया है. अभिषेक के एक करीबी नेता ने मीडिया को बताया कि राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं को फोन किया और प्रोजेक्टर पर मतदान में धांधली का मुद्दा उठाया. तृणमूल ने इसे बूथ दर बूथ लागू किया है. यही ममता और राहुल के बीच का अंतर है.

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