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कोरबा:जरहाजेल के भू-विस्थापितों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापनजमीन वापसी, लंबित रोजगार व पेड़ कटाई की अनुमति निरस्त करने की मांग

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कोरबा 23 नवंबर 2025 (वेदांत समाचार)। ग्राम जरहाजेल के भू-विस्थापितों ने सोमवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के खिलाफ विरोध जताते हुए जमीन वापसी और पेड़ों की कटाई की अनुमति रद्द करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1983 में किए गए भूमि अधिग्रहण अवॉर्ड में स्पष्ट प्रावधान हैं कि 20 वर्ष बाद अधिग्रहित भूमि मूल खातेदारों को वापस की जानी चाहिए, लेकिन कंपनी नियमों का पालन नहीं कर रही है।

विस्थापित दामोदर श्याम, इंद्रप्रकाश और घासीराम कैवर्त ने बताया कि भूमि अधिग्रहण मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 247(1) के तहत किया गया था। 27 अप्रैल 1983 को तत्कालीन अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा पारित आदेश में पाँच प्रमुख शर्तें निर्धारित की गई थीं। इसके तहत उत्खनन, सड़क, रेल लाइन और आवास निर्माण के लिए ली गई जमीन को 60 वर्ष बाद भू-स्वामियों को वापस करने का स्पष्ट प्रावधान शामिल है। साथ ही विस्थापितों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना कंपनी के लिए अनिवार्य बताया गया था।

ग्रामीणों ने कहा कि अवॉर्ड में कहीं भी अन्य ग्रामों को बसाने का प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद एसईसीएल द्वारा अन्य गांवों के पुनर्वास के लिए जरहाजेल क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगी गई है, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि आज भी रोजगार और मुआवजा के कई प्रकरण लंबित हैं। एसईसीएल अधिग्रहण अवॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर रोजगार रोक रही है, जबकि उसी जमीन का वर्षों से उपयोग किया जा रहा है।

विस्थापितों ने मांग की कि पेड़ों की कटाई की अनुमति तत्काल निरस्त की जाए और अधिग्रहित भूमि को मूल खातेदारों या उनके परिजनों को सुपुर्द किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीणों में संतोष, बजरंग सोनी, मोहन, फीरत, पुरुषोत्तम, हरिशरण, विशेष्वर, शिव नारायण, दीनानाथ, डुमन, दुलचंद, रेशम, गंगा प्रसाद, टकेश्वर, कमलेश, केदार कश्यप, लक्ष्मण, वीरेंद्र, राकेश सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

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