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KORBA NEWS : अतीत की विरासत को सहेजना बड़ी उपलब्धि…

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शासकीय कॉलेज करतला ने किया खास आयोजन

कोरबा,05 दिसंबर (वेदांत समाचार)। छ.ग. शासन एवं अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के निर्देशानुसार जनजातीय गौरव माह के अंतर्गत जनजातीय समाज के गौरवशाली अतीत – ऐतिहासिक, सामाजिक, आध्यात्मिक योगदान विषय पर शासकीय महाविद्यालय करतला , जिला- कोरबा में कार्यक्रम का आयोजन पिछले दिनों किया गया तथा इस कार्यक्रम में हमारे जनजाति समाज के जनजीवन में उपयोग किए जाने वाले सामग्री एवं उनके संस्कृति के सुरता के रूप में महाविद्यालय में ’ पुरखा के सुरता ’ का विधिवत उद्घाटन इस समारोह के मुख्य अतिथि- जुड़ावन सिंह ठाकुर, प्रांत अध्यक्ष, विद्या भारती, विशिष्ट अतिथि रघुराज सिंह उईके एवं बीरबल सिंह, संगठन मंत्री , वनवासी कल्याण आश्रम कोरबा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मां सरस्वती, छत्तीसगढ़ महतारी, भगवान बिरसा मुंडा ,शहीद वीर नारायण सिंह ,रानी दुर्गावती के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया, तत्पश्चात राज्य गीत का गायन किया गया । अतिथियों का जनजातीय परंपरा के अनुसार हाथ धुलाकर एमहाविद्यालय के प्राचार्य मृगेश कुमार यादव द्वारा स्वागत एवं इस ‘पुरखा के सुरता’ को महाविद्यालय के नवाचार के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धि बताया जो कि डॉ घनश्याम संयुक्त संचालक उच्च शिक्षा विभाग के प्रेरणा से सम्भव हुआ है। महाविद्यालय के जनजाति गौरव समिति के संयोजक डॉ सपना मिश्रा, श्रीमती मनीषा मिंज, अन्य प्राध्यापगण के साथ यहां के छात्र – छात्राओं के अथक परिश्रम से इसका निर्माण हुआ है, जुड़ावन सिंह ठाकुर ने कहा कि जनजाति समाज की संस्कृति बहुत ही विविध और समृद्ध है। उनके पास अपनी अलग-अलग नृत्य, संगीत और कला रूप हैं ।

जनजाति समाज के लोग अपने पारंपरिक तरीके से जीवन जीते हैं और प्रकृति के साथ सामंजस्य से बनाए रखते हैं। आज भी जनजातीय समाज के लोग अपने समुदाय के विकास और उत्थान के लिए काम कर रहे हैं। वे शिक्षा स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनको साजो के रखना हमारा दायित्व है , इसी कड़ी में ‘पुरखा के सुरता’ की कल्पना कर उसको साकार करना महाविद्यालय की बहुत बड़ी उपलब्धि है एवं पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायी सार्थक प्रयास है। करतला महाविद्यालय जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है । जनजातियों के कला एवं संस्कृति को इंगित करने के लिए महाविद्यालय के द्वारा ’पुरखा के सुरता’ स्थान का निर्माण किया गया है।

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