नई दिल्ली 25 नवंबर 2025। दिल्ली के लालकिले बम धमाके मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। एनआईए को ऐसे वीडियो मिले हैं जो जैश ए मोहम्मद और फिलिस्तीनी संगठन हमास के बीच गहरे संबंधों की पुष्टि करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस साजिश की शुरुआत फरवरी में हुई थी और अब पूरा नेटवर्क खुलकर सामने आ रहा है।
हमास की रणनीति की कॉपी
जांच में पता चला कि जैश का व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल हमास की रणनीति पर काम कर रहा था। कश्मीर से लेकर हरियाणा तक इस मॉड्यूल का नेटवर्क फैला हुआ था। ड्रोन का हथियारों के लिए इस्तेमाल और अस्पतालों को हथियार छिपाने की जगह बनाना हमास की पद्धति से मेल खाता है। एजेंसियों का कहना है कि यह समानता महज संयोग नहीं है।
जैश और हमास का आम मंच पर आना
5 फरवरी को पकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रावलकोट में हमास नेता डॉ. खालिद कद्दौमी और डॉ. नाजी जहीर ने जैश और लश्कर के आतंकियों के साथ मंच साझा किया था। सुरक्षा एजेंसियां इसे संकेत मान रही हैं कि आतंकी नेटवर्क अब वैश्विक स्तर पर अपनी तालमेल बढ़ा रहे हैं।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी के लॉकरों की जांच तेज
अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े व्हाइट कॉलर मॉड्यूल के उजागर होने के बाद कई डॉक्टर और कर्मचारी गायब हैं। एजेंसियां अब उनके लॉकर खंगाल रही हैं। अब तक कई मोबाइल और टैब बरामद हुए हैं जिनकी साइबर जांच की जा रही है ताकि संपर्कों की श्रृंखला का पता लग सके।
फरीदाबाद और नूंह में केमिकल खरीद की जांच
धौज और फतेहपुर तगा में संदिग्ध विस्फोटक मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अमोनियम नाइट्रेट जैसे केमिकल फरीदाबाद और नूंह क्षेत्र से खरीदे गए थे। पुलिस अब खाद की दुकानों और केमिकल विक्रेताओं से भी पूछताछ कर रही है।



