Vedant Samachar

मोतिहारी के केसरिया में इतिहास रचा गया: विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित हुई दुनिया की सबसे बड़ी शिवलिंग

Vedant samachar
5 Min Read

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित केसरिया प्रखंड के कठौलिया गांव में बन रहे विराट रामायण मंदिर परिसर में आज एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब दुनिया की सबसे बड़ी शिवलिंग की विधिवत स्थापना की गई। करीब 120 एकड़ क्षेत्र में आकार ले रहा यह मंदिर विश्व का सबसे विराट रामायण मंदिर बताया जा रहा है, जो सनातन संस्कृति और आस्था का एक भव्य केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

इस विशाल शिवलिंग को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से बिहार लाया गया है। करीब 2500 किलोमीटर की दूरी और 40 दिनों से अधिक की लंबी यात्रा तय कर यह शिवलिंग केसरिया पहुंची। ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित इस शिवलिंग को तैयार करने में पूरे 10 साल का समय लगा है। विशेष बात यह है कि इस शिवलिंग पर 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं और इसके निर्माण में 1008 कारीगरों ने योगदान दिया है, जो इसे धार्मिक के साथ-साथ शिल्पकला की दृष्टि से भी अद्वितीय बनाता है।

विराट रामायण मंदिर की परिकल्पना पूर्व आईपीएस अधिकारी और महावीर न्यास बोर्ड के पूर्व सचिव आचार्य कुणाल किशोर का सपना थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में इस मंदिर की नींव रखी थी, लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं हैं। उनके सपने को साकार करने का कार्य उनके पुत्र सयान कुणाल ने आगे बढ़ाया। शिवलिंग की स्थापना के अवसर पर उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। सयान कुणाल ने बताया कि इस मंदिर के निर्माण से न सिर्फ धार्मिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि पूरे क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा। अयोध्या के बाद यह देश का एक बड़ा धार्मिक केंद्र बनेगा, जहां होटल, एयरपोर्ट, हाईवे और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास होगा।

इस विशाल शिवलिंग की स्थापना अपने आप में एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती थी। करीब 200 मैट्रिक टन यानी दो लाख किलोग्राम वजन और 33 फीट ऊंचाई वाली इस शिवलिंग को स्थापित करना बेहद कठिन कार्य था। इंजीनियरों की विशेषज्ञ टीम ने इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया। शिवलिंग को 30 फीट ऊंचे गुंबद पर स्थापित किया गया है, जिससे इसकी कुल ऊंचाई 60 फीट से अधिक हो गई है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब आधे घंटे का समय लगा और दो भारी-भरकम क्रेनों की मदद से पहले शिवलिंग को हवा में उठाया गया, फिर सटीक तरीके से ऊंचाई पर स्थापित किया गया। शिवलिंग निर्माण टीम के मॉडरेटर वेंकटेश विनायक ने बताया कि दस वर्षों की मेहनत के बाद आज यह शिवलिंग अपने निर्धारित स्थान पर स्थापित हो सकी है।

विराट रामायण मंदिर के निर्माण से रामायण सर्किट को भी नया विस्तार मिलने की उम्मीद है। इस क्षेत्र में सनातन संस्कृति और रामायण परंपरा का प्रचार-प्रसार तेजी से हो रहा है। अयोध्या और हनुमान गढ़ी से आए साधु-संतों ने भी मंदिर निर्माण और शिवलिंग स्थापना को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की और इसे आस्था के लिए एक बड़ा केंद्र बताया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केसरिया में हो रहे निर्माण कार्य की जानकारी ली और अपने अधिकारियों को मौके पर भेजा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और डीजीपी विनय कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री को मंदिर के डिजाइन और निर्माण कार्य की विस्तृत जानकारी दी। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि यह विराट शिवलिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सनातन संस्कृति से जुड़े सपनों को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इसके निर्माण से पूरे क्षेत्र का विकास होगा और रामायण सर्किट को और मजबूती मिलेगी।

विराट रामायण मंदिर और विश्व की सबसे बड़ी शिवलिंग की स्थापना के साथ ही केसरिया अब धार्मिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है।

Share This Article