Vedant Samachar

आचार्य चाणक्य स्मृति दिवस पर रायपुर में भव्य आयोजन, व्याख्यान, विप्र सम्मान और धार्मिक प्रश्नोत्तरी सम्पन्न

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रायपुर, 20 जनवरी (वेदांत समाचार)। वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन एवं सर्व युवा ब्राह्मण परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आचार्य चाणक्य स्मृति दिवस का भव्य आयोजन वृन्दावन हॉल, रायपुर में किया गया। कार्यक्रम में आचार्य चाणक्य के जीवन, दर्शन और सिद्धांतों पर विद्वानों ने विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर विप्र सम्मान समारोह के साथ-साथ दर्शकों के लिए धार्मिक प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के अध्यक्ष शशांक शर्मा तथा वरिष्ठ समाजसेवी राजेश अग्रवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सम्मानित विद्वान वक्ताओं के रूप में वरिष्ठ निदेशक नवभारत प्रेस उमाशंकर व्यास, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कार्य परिषद सदस्य प्रभात मिश्र एवं राष्ट्रवादी कवि ईशान शर्मा ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात सुमन मिश्रा एवं वीणा मिश्रा द्वारा गणेश वंदना की मनोहारी प्रस्तुति दी गई। मंच से अतिथियों का स्वागत करते हुए वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द ओझा ने संगठन द्वारा वर्ष भर किए जा रहे सामाजिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक कार्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम संयोजक अजय अवस्थी ने आचार्य चाणक्य स्मृति दिवस की पृष्ठभूमि, समाज में ब्राह्मणों की भूमिका तथा कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

विद्वान वक्ता उमाशंकर व्यास ने अपने संबोधन में कहा कि आचार्य चाणक्य का दर्शन सामाजिक समरसता पर आधारित है और क्षेत्रीयता के नाम पर समाज में वैमनस्य फैलाना अनुचित है। मुख्य अतिथि संदीप शर्मा ने कहा कि चाणक्य ने छोटे-छोटे जनपदों में बंटे भारत को एक सूत्र में पिरोने का सपना देखा था। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक एकता एवं अखंड भारत का विचार आधुनिक हिंदुत्व का एक मजबूत स्तंभ है।

विशिष्ट अतिथि वर्णिका शर्मा ने कहा कि चाणक्य की नीति ‘साम, दाम, दंड, भेद’ तथा यह विचार कि “शांति केवल शक्तिशाली राष्ट्र ही स्थापित कर सकते हैं”, आज के सशक्त भारत और राष्ट्रीय सुरक्षा की नीतियों से मेल खाता है। विशिष्ट अतिथि राजेश अग्रवाल ने कहा कि धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति नहीं बल्कि कर्तव्य और न्याय है। “सुखस्य मूलं धर्मः” के माध्यम से उन्होंने बताया कि धर्म ही समाज को अनुशासित और नैतिक बनाता है।

छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा कि समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए आज चाणक्य दर्शन की अत्यंत आवश्यकता है। विद्वान वक्ता प्रभात मिश्र ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी बुद्धि और विवेक से दूसरों के हित में कार्य करता है, वह स्वयं अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है। राष्ट्रवादी कवि ईशान शर्मा ने सनातन मूल्यों की रक्षा और उनके प्रचार-प्रसार का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान दर्शकों के लिए आयोजित धार्मिक प्रश्नोत्तरी में गुणानिधि मिश्रा एवं अरविन्द ओझा ने प्रश्न पूछे। सही उत्तर देने वाले सभी प्रतिभागियों को मंच से अतिथियों द्वारा सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में संगठन के पदाधिकारियों द्वारा सभी अतिथियों एवं विद्वान वक्ताओं को शाल, स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द ओझा, महिला अध्यक्ष नमिता शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव सुरेश मिश्रा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गुणानिधि मिश्रा, कार्यक्रम संयोजक अजय अवस्थी, प्रदेश महासचिव सुनील ओझा, प्रदेश सलाहकार रज्जन अग्निहोत्री, त्रिभुवन नाथ तिवारी, युवा अध्यक्ष अविनय दुबे, प्रदेश उपाध्यक्ष यशवंत पुरोहित, संभागीय अध्यक्ष नितिन कुमार झा, महिला महासचिव सुमन मिश्रा, सांस्कृतिक सचिव प्रीति मिश्रा सहित बड़ी संख्या में महिला एवं युवा पदाधिकारी, समाज के गणमान्य नागरिक और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन अजय अवस्थी एवं अरविन्द ओझा ने संयुक्त रूप से किया, जबकि आभार प्रदर्शन महिला अध्यक्ष नमिता शर्मा द्वारा किया गया।

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