पंजीकृत रकबा और किसान शेष रहने के बावजूद धान की आवक कम करने का तरीका
रायगढ़,22जनवरी (वेदांत समाचार )। धान खरीदी में अब छह दिन ही बाकी हैं। प्रतिदिन धन की आवक को एक लाख क्विंटल से कम करने के लिए समिति की लिमिट में कटौती कर दी है। दरअसल पहले छोटे किसान थे तो कम लिमिट में भी खरीदी हो गई। लेकिन अब बड़े किसान ही बचे हैं इसलिए धान ज्यादा ही आएगा। इसका विरोध कर रहे किसानों ने पुसौर समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किया। रायगढ़ जिले में धान खरीदी नियंत्रित तरीके से चल रही है। कहा जा रहा है कि 47 लाख क्विंटल तक ही खरीदी को रोकना है।
जिले में 85241 किसानों का पंजीयन किया गया था जिसमें से करीब 68500 ने धान बेच लिया है। अभी भी करीब 17 हजार किसान ऐसे हैं, जो एक बार भी धान नहीं बेच सके हैं। इनमें से ज्यादातर बड़े किसान हैं। कई किसानों का केवल पंजीयन होता है, वे धान बेचने नहीं आते। पूरे किसानों ने किसी भी साल धान नहीं बेचा है। वर्तमान में खरीदे गए धान की मात्रा 44 लाख क्विंटल के पार हो चुकी है। प्रतिदिन करीब एक लाख क्विंटल की धान खरीदी की जा रही थी। इसे रोकने के लिए समितियों में धान खरीदी की लिमिट तय कर दी गई है। छोटे किसानों के हिसाब से लिमिट सही थी लेकिन अब बड़े किसान सिंगल टोकन पर पूरा धान बेचना चाहते हैं। इसे लेकर पुसौर में विरोध प्रदर्शन किया गया। किसानों ने सडक़ जाम कर दिया। ऐसा ही कई समितियों में हो रहा है। इस वजह से किसानों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
अब खरीदी 70 हजार पर अटकी
पिछले सप्ताह प्रतिदिए एक लाख क्विंटल से अधिक धान खरीदा जा रहा था। इस हिसाब से अंतिम दिन तक सात लाख क्विंटल धान खरीदा जाता। इसे देखकर समितियों में लिमिट कम कर दी गई। मंगलवार को जिले में करीब 61 हजार क्विंटल धान ही खरीदा गया। आने वाले छह दिनों में यदि दस हजार किसान भी धान बेचना चाहें तो प्रशासन की परेशानी बढ़ सकती है।



