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EPFO: 2030 में रिटायर होने वाले प्राइवेट कर्मचारियों को हर महीने मिलेंगे इतने रुपये, ऐसे करे कैलकुलेशन

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प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के मन में अक्सर बुढ़ापे की सुरक्षा को लेकर एक डर बना रहता है. लेकिन, अगर आपका पीएफ (PF) कटता है, तो आपको निराश होने की जरूरत नहीं है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ईपीएस (EPS) स्कीम प्राइवेट नौकरीपेशा लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. अगर आप आने वाले कुछ सालों में, मान लीजिए 2030 में रिटायर होने की योजना बना रहे हैं, तो हम आपको बताएंगे कि रिटायरमेंट के बाद वास्तव में आपके हाथ में हर महीने कितनी पेंशन आएगी.

सैलरी से कटने वाला पैसा ही बनता है बुढ़ापे का सहारा
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पेंशन का पैसा आता कहां से है. जब हर महीने आपकी सैलरी से पीएफ का पैसा कटता है, तो उसका एक हिस्सा आपके भविष्य निधि (EPF) में जमा होता है और दूसरा हिस्सा कंपनी की तरफ से जमा किया जाता है. कंपनी के योगदान का एक बड़ा भाग ‘इम्प्लॉईज पेंशन स्कीम’ (EPS) में जाता है.

यही जमा पूंजी बाद में पेंशन का रूप लेती है. हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें भी हैं. पेंशन का हकदार बनने के लिए कम से कम 10 साल की नौकरी (पेंशन योग्य सेवा) होनी चाहिए. आमतौर पर 58 साल की उम्र में पूरी पेंशन मिलती है, लेकिन अगर कोई चाहे तो 50 साल की उम्र से भी कम पेंशन (Reduced Pension) लेना शुरू कर सकता है.

अपना पासबुक देखें और ऐसे निकालें हिसाब
पेंशन कैलकुलेशन का फॉर्मूला सुनने में जटिल लग सकता है, लेकिन यह बेहद सीधा है. ईपीएफओ द्वारा तय किया गया फॉर्मूला है: (पेंशन योग्य सैलरी × नौकरी के कुल साल) / 70

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पेंशन की गणना के लिए आपकी अधिकतम सैलरी की सीमा (Basic Salary + DA) 15,000 रुपये प्रति माह मानी गई है. यानी अगर आपकी बेसिक सैलरी इससे ज्यादा भी है, तो भी कैलकुलेशन 15,000 रुपये पर ही होगा. नौकरी के साल का मतलब है कि आपने कितने साल ईपीएस में योगदान दिया है.

2030 में रिटायरमेंट पर कितनी बनेगी रकम?
इस पूरे गणित को एक आसान उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए एक कर्मचारी हैं कन्हैया, जो साल 2030 में रिटायर होने वाले हैं. उस समय तक उनकी कुल नौकरी 25 साल की हो जाएगी. चूंकि पेंशन की गणना के लिए अधिकतम सैलरी 15,000 रुपये फिक्स है, तो कन्हैया की पेंशन कुछ इस तरह बनेगी: 15,000 (सैलरी) × 25 (साल) ÷ 70 = ₹5,357 (लगभग)

इस हिसाब से कन्हैया को रिटायरमेंट के बाद हर महीने करीब 5,357 रुपये की पेंशन मिलेगी. यहां एक और पेंच है, अगर कन्हैया 58 साल का इंतजार नहीं करते और 50 साल की उम्र से पेंशन लेना शुरू करते हैं, तो उन्हें हर साल 4% कम पेंशन मिलेगी. वहीं, अगर वो 58 के बजाय 60 साल तक पेंशन को टालते हैं, तो उनकी पेंशन राशि बढ़कर मिलेगी.

संसद में सरकार ने दी बड़ी जानकारी
पेंशन को लेकर सरकार भी लगातार सक्रिय है. हाल ही में संसद में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने जानकारी दी कि ईपीएफओ ने ‘हायर पेंशन’ (ज्यादा पेंशन) के लिए आए लगभग 99 प्रतिशत आवेदनों को प्रोसेस कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए विभाग तेजी से काम कर रहा है. साथ ही, सरकार ने यह भी साफ किया है कि नए सोशल सिक्योरिटी कोड लागू होने के बाद, 15,000 रुपये की वेतन सीमा से ऊपर का योगदान स्वैच्छिक होगा, यानी यह कर्मचारी और कंपनी की इच्छा पर निर्भर करेगा.

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