कोरबा, 21 सितम्बर (वेदांत समाचार)। समाज में फैली दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ एक सकारात्मक संदेश देते हुए नगर पंचायत करतला के सामुदायिक भवन में संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में जिला स्तरीय आध्यात्मिक सत्संग एवं एक जोड़ी अंतर्जातीय दहेज-मुक्त विवाह का आयोजन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे और इस अनूठी पहल को सराहनीय करार दिया।
एकता और सादगी का उदाहरण
इस विवाह में कोरबा जिले की भक्तमती दामिनी महंत (पिता श्री रूपदास महंत, ग्राम चचिया, आयु 25 वर्ष) और महासमुंद जिले के भक्त देवेंद्र चौहान (पिता श्री तेजराम चौहान, ग्राम छिलपावन, आयु 26 वर्ष) ने सात जन्मों का बंधन स्वीकार किया। वर-वधू के माता-पिता व रिश्तेदारों की उपस्थिति में यह आयोजन सादगीपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। दहेज रहित इस विवाह को देखकर उपस्थित लोगों ने इसे समाज के लिए प्रेरणा बताया।
कबीर गुरुवाणी ‘रमैणी’ पद्धति में सम्पन्न हुआ विवाह
संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों द्वारा विवाह ‘रमैणी’ पद्धति से सम्पन्न कराया गया। यह शास्त्र-आधारित पद्धति है जिसमें 33 करोड़ देवी-देवताओं का आह्वान कर मात्र 17 मिनट में विवाह सम्पन्न हो जाता है। इस विधि में न तो फिजूल खर्च होता है और न ही आडंबर।

दहेज-मुक्त विवाह की विशेषताएँ
दहेज का लेन-देन नहीं : गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ समाप्त होता है।
सादगीपूर्ण समारोह : बिना दिखावे और आडंबर के सम्पन्न।
शास्त्रीय परंपरा पर आधारित : विवाह को धार्मिक एवं सामाजिक आधार प्राप्त।
कुरीतियों का अंत : दहेज प्रथा मिटाने का सशक्त संदेश।
नई पीढ़ी के लिए मिसाल : युवाओं को समानता और सादगी अपनाने की प्रेरणा।
हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति
इस अवसर पर जगतदास महंत, अजय कुर्रे, धरमदास, सुमरन सिंह कंवर, इतवारी साहू, दिलीप बारेठ, बाबू दास, पंचराम पाटिल, उमाशंकर, शिवनारायण जगत, संतोष एडवोकेट, विनोद, गया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
समाज में जागरूकता का संदेश
विवाह समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि दहेज प्रथा समाज में विभाजन और आर्थिक असमानता को बढ़ावा देती है। ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा देने वाले हैं। संत रामपाल जी महाराज की यह पहल निश्चित रूप से दहेज जैसी कुरीतियों के उन्मूलन में मील का पत्थर साबित होगी। यह आयोजन न केवल दो परिवारों का मिलन रहा, बल्कि पूरे समाज के लिए एक मजबूत संदेश भी बना कि सादगी और दहेज-मुक्त विवाह ही समय की सच्ची आवश्यकता है।



