धमतरी ,05अप्रैल 2025 (वेदांत समाचार) । धमतरी जिले के अंतिम छोर पर बसे आदिवासी बहुल अंचल के ग्रामवासी आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। नगरी विकासखंड अंतर्गत उड़ीसा सीमा से लगे ग्राम पंचायत बोरई, लिखमा, घुटकेल एवं मैनपुर के ग्रामीण अब भी सड़क, स्वास्थ्य, बिजली और पानी जैसी प्राथमिक सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
इस क्षेत्र में लो वोल्टेज की समस्या इतनी गंभीर है कि बच्चों को आज भी चिमनी और दीयों की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि वे विगत कई वर्षों से संघर्ष समिति के बैनर तले अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के समक्ष लगातार आवाज़ उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। केवल आश्वासन देकर जिम्मेदार अधिकारी समय निकालते जा रहे हैं।
ओवरलोड वाहनों से सड़कें बर्बाद, हादसों का सिलसिला जारी
ग्रामीणों का कहना है कि भारतमाला परियोजना के तहत भारी ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से बोरई मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए बोरई संघर्ष समिति ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर ओवरलोड वाहनों पर रोक लगाने और तत्काल सड़क मरम्मत की मांग की थी। समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेंगे।
5 अप्रैल को ग्रामीणों ने रोका सड़क, ओवरलोड वाहनों को दिखाया बाहर का रास्ता
अपने चेतावनी के अनुसार आज 5 अप्रैल को बोरई संघर्ष समिति के सैकड़ों ग्रामीणों ने सुबह से ही बोरई मार्ग पर प्रदर्शन करते हुए ओवरलोड वाहनों की आवाजाही को रोक दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और सड़क की मरम्मत शुरू नहीं होती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
गांववालों की लगातार शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी अब स्थानीय जनता के लिए असहनीय होती जा रही है। सवाल उठता है कि क्या आदिवासी अंचल में रहने वाले इन लोगों की आवाज तब तक नहीं सुनी जाएगी जब तक वे उग्र आंदोलन नहीं करते? अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इन ग्रामीणों की आवाज़ पर संज्ञान लेता है और क्या वास्तव में उनके लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है या फिर यह भी एक और आश्वासन बनकर रह जाएगा।