अंबिकापुर ,08 दिसंबर (वेदांत समाचार)। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (MCH) अंबिकापुर में एक प्रसूता की मौत के मामले ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। बलरामपुर जिले की निवासी सुनीता सिंह (35) का एक ही दिन में दो बार ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। रायपुर रेफर किए जाने के बाद भी उसे बड़े अस्पतालों में भर्ती नहीं किया गया और अंबिकापुर लौटते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजनों ने इसे चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही से साफ इनकार किया है।
त्रिकुंडा थाना क्षेत्र के कृष्णनगर निवासी सुनीता सिंह नौ माह की गर्भवती थी। 4 दिसंबर को प्रसव पीड़ा बढ़ने पर मितानिन संगीता सिंह उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बगड़ा लेकर गई। वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने मामले को जोखिम भरा बताते हुए जिला अस्पताल बलरामपुर रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में भी चिकित्सकों ने बच्चे को खतरा बताते हुए तुरंत अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल भेजने की सलाह दी। परिजन उसी शाम सुनीता को लेकर अंबिकापुर पहुंचे, जहां उसे MCH के गायनी वार्ड में भर्ती कर लिया गया। रात करीब 1.30 बजे सुनीता का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, जिसमें उसने 3.40 किलोग्राम के एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
परिवार ने राहत की सांस ली, क्योंकि ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। सुनीता की निगरानी मेडिकल टीम कर रही थी, लेकिन अगले ही दिन उसकी स्थिति अचानक बिगड़ने लगी। 5 दिसंबर की शाम उसके ऑपरेशन वाले टांके से खून बहने लगा। परिजनों ने जब इसकी सूचना चिकित्सा स्टाफ को दी, तो पूरे वार्ड में हड़कंप मच गया। डॉक्टरों ने तत्काल उसकी जांच की और उसे फिर से ऑपरेशन थिएटर ले जाने का निर्णय लिया। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि सुनीता का यूटरस ढीला पड़ गया है और पेट में खून जमने लगा है। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है, इसलिए यूटरस निकालना आवश्यक है।
परिजनों ने मजबूरी में सहमति दी। दूसरा ऑपरेशन देर शाम तक चला, जिसके बाद यूटरस हटा दिया गया। लेकिन इस प्रक्रिया के बाद सुनीता की तबीयत तेजी से बिगड़ती चली गई। उसका यूरिन आउटपुट बंद हो गया और ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित नहीं हो पा रहा था। ब्लड चढ़ाने के बावजूद हालत में सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए 6 दिसंबर को रायपुर रेफर कर दिया। सुनीता को लेकर परिजन रायपुर के मेकाहारा अस्पताल पहुंचे, जहाँ डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर बताते हुए एम्स रायपुर ले जाने को कहा। इसके बाद जब वे एम्स पहुंचे, तो वहां बताया गया कि आईसीयू और संबंधित वार्ड में कोई बेड उपलब्ध नहीं है। परिजनों के मुताबिक, उन्हें बिना इलाज वापस उन्हीं अस्पतालों में लौट जाने की बात कही गई, जहां से वे आए थे।
निराश परिजन सुनीता को लेकर अंबिकापुर लौटने लगे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मृतका के परिवार ने आरोप लगाया कि पहला ऑपरेशन सही ढंग से नहीं किया गया और टांकों से होने वाले खून बहाव को समय रहते नहीं रोका गया। उनका कहना है कि रेफर सिस्टम की भारी अव्यवस्था और बड़े अस्पतालों का गैर-जिम्मेदार रवैया भी सुनीता की मौत की वजह बना। सुनीता तीन बच्चों की मां थी और उसके सभी प्रसव सामान्य हुए थे। यह चौथा प्रसव था, जिसके लिए उसने ऑपरेशन करवाया। अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही से इनकार किया है।
MCH के गायनी वार्ड के HOD डॉ. अविनाशी कुजूर ने कहा कि पहले ऑपरेशन के बाद मां और बच्चा दोनों स्वस्थ थे। टांके से रक्तस्राव होने पर सोनोग्राफी की गई, जिसमें पता चला कि यूटरस ढीला होकर रक्त जमा हो रहा है, इसलिए जान बचाने के लिए यूटरस निकालना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि सुनीता को ब्लड चढ़ाया गया और बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया। सुनीता की मौत के बाद ग्रामीणों और परिजनों में आक्रोश है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कई खामियों को उजागर कर दिया है, खासकर रेफरल सिस्टम और बड़े अस्पतालों के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।



