क्रोध ना करना बड़ी तपस्या, मान को गलाना साधना की पहली सीढ़ी
रायपुर,22अगस्त (वेदांत समाचार) । टैगोर नगर स्थित पटवा भवन में पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को युवा मनीषी मनीष सागरजी महाराज ने क्रोध न करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि क्रोध न करना सबसे बड़ी तपस्या है और मान कषाय को गलाना साधना के लिए पहली सीढ़ी है। सभी गुणों में पहला गुण है विनय। हमें हमेशा प्रयास करना चाहिए कि यदि सभी कार्यों को करने में सक्षम न हो तो हमें जो बेहतर है, उसे सबसे पहले करना चाहिए।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि मान छूटेगा तो गुरु मिलेंगे। गुरु मिलेंगे तो सत्य मिलेगा। सत्य मिलेगा तो साधना होगी। साधना होगी तो सिद्धता हासिल होगी। मान गलाने की साधना करने का अवसर संवत्सरी प्रतिक्रमण है। पूरे आठ दिनों में हमें अवसर मिला है। ऐसा ना सोचे कि अंतिम दिन समय मिलने वाला है। जिससे भी जो भी बैर है पहले दिन से ही चिंतन करो। किसी से भी हमें बैर है उसे मिटा दो। जरूरी नहीं संवत्सरी प्रतिक्रमण करना ही क्षमा मांगना व देना है। पहले से ही जो याद आते जाएं क्षमा देना व मांगना शुरू करो।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि प्रतिदिन द्रव्य व भाव से पूजा करना चाहिए। साधु और श्रावक का कर्तव्य है प्रतिदिन पूजा करना। अपने आदर्श से रोज मिलना चाहिए। रोज चरण स्पर्श कर वंदन करना चाहिए। 8 दिन में हिंसा व पाप के कार्य से दूर रहना चाहिए। मन हमारा इतना कमजोर हो गया है कि हम अनुशासित नहीं रह पाते। पहले अपने आप को अनुशासित करना आवश्यक है। अपने आप को योग्य बनाना है। हमें जिन शासन पुण्य से प्राप्त हुआ है। इसका सदुपयोग आवश्यक है।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि चातुर्मास का सभी दिन महत्वपूर्ण है। चातुर्मास स्वयं पर्व है। पर्युषण पर्व 8 दिन का होता है।।यदि किसी को अपनी आत्मा का कल्याण करना है तो चातुर्मास के एक-एक दिन महत्वपूर्ण है। एक-एक दिन को कीमती मानकर अपने ज्ञान, दर्शन,चारित्र्य को निर्मल करने का प्रयास होना चाहिए। आत्म कल्याण करने का सबसे छोटा कोर्स चार माह है। पर्युषण करना श्रावक व साधु के लिए अनिवार्य है। चार माह में यदि कोई अधिक समय नहीं निकाल सकता तो ये आठ दिन सबसे बेहतर है। इसी में अपनी आत्म कल्याण की भावना होनी चाहिए।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि पर्यूषण पर्व में कल्पसूत्र का वांचन होता है। कल्पसूत्र वांचन पहले साधु साध्वियों करते थे। श्रावकों के लिए भी यह व्यवस्था हुई। कल्पसूत्र का वांचन एकाग्र और समर्पण भावना से सुनना चाहिए। कल्पसूत्र के कथानक के माध्यम से मार्ग मिलता है। वास्तव में मुक्ति का मार्ग क्या है, इसमें बताया गया है। इसमें कर्मों से मुक्ति के साथ-साथ जीवन के दुखों से मुक्ति का मार्ग है। परमात्मा के जीवन चरित्र को समझ कर अपने जीवन में अपनाने का मार्ग है। कल्पसूत्र में साधु संतों के कर्तव्य बताए गए हैं। इसे समझकर श्रावक भी अपने जीवन को साधु का जीवन बना सकते हैं।
21 दिवसीय दादा गुरु इकतीसा 31 अगस्त से
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्यामसुंदर बैदमुथा ने बताया कि 21 दिवसीय दादागुरु इकतीसा पाठ 31 अगस्त से प्रारंभ होगा। इसमें में मंगल कलश स्थापना और प्रतिमा विराजमान करने का का लाभ कमलाबाई, पुखराज, सुनील कुमार,अनिल कुमार, मनोज कुमार लोढ़ा परिवार को मिला। अखंड दीपक का लाभ अनोपचंद, विजय कुमार,विशेष कुमार, छाजेड़ परिवार को मिला। तोरण बांधने का लाभ वीरेंद्र कुमार अग्रवाल परिवार को मिला। रविवार को सुबह प्रवचन 8:15 से 10 बजे तक होगा। दोपहर 1:30 बजे से भगवान का जन्मवांचन होगा।



