Vedant Samachar

बड़ी खबर: अब यहां भी प्रदूषित पानी का कहर, 104 बच्चे अस्पताल में भर्ती, नए वार्ड शुरू करने पड़े,प्रशासन में हड़कंप

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0 स्मार्ट सिटी की पाइपलाइन में सीवेज का रिसाव बना मुसीबत; गृह मंत्री अमित शाह और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने संभाला मोर्चा

गांधीनगर। गुजरात की राजधानी गांधीनगर में पीने के पानी में सीवेज की गंदगी मिलने से स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। पिछले तीन दिनों के भीतर गंदा पानी पीने से 104 बच्चे बीमार पड़ गए हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत बच्चों में टाइफाइड की पुष्टि हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांधीनगर सिविल अस्पताल में आनन-फानन में एक नया वार्ड (वार्ड नंबर 604) खोलना पड़ा है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की पाइपलाइन में 10 जगह लीकेज

जांच में सामने आया है कि शहर के सेक्टर-24, 28 और आदिवाड़ा इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। हैरानी की बात यह है कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत करोड़ों की लागत से बिछाई गई नई पाइपलाइन में 10 अलग-अलग स्थानों पर लीकेज पाए गए हैं, जहाँ से पीने के पानी में गंदा पानी मिल रहा था। फिलहाल प्रशासन ने रिसाव की मरम्मत और पानी में क्लोरीन मिलाने का काम शुरू कर दिया है।

अस्पताल में बच्चों की कतार, डॉक्टर अलर्ट पर

सिविल अस्पताल की अधीक्षक डॉ. मिताबेन पारिख के अनुसार, अस्पताल में भर्ती 104 बच्चों में से अधिकांश 1 से 16 वर्ष की आयु के हैं। बच्चे तेज बुखार, पेट दर्द और उल्टी की शिकायत लेकर आ रहे हैं। डॉ. पारिख ने बताया कि पिछले तीन दिनों में मरीजों की संख्या में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल बच्चों का इलाज वार्ड F2, E2 और नए बने वार्ड 604 में IV फ्लूइड और एंटीबायोटिक्स के जरिए किया जा रहा है।

40 टीमें और 22 डॉक्टरों का विशेष दस्ता तैनात

मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जिला कलेक्टर से फोन पर चर्चा कर स्थिति का जायजा लिया है। वहीं, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने शनिवार को सिविल अस्पताल का दौरा किया और उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

  • स्थिति पर नियंत्रण के लिए 22 डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित की गई है।
  • फील्ड पर 80 से ज्यादा कर्मचारियों की 40 टीमें तैनात की गई हैं।
  • स्वास्थ्य टीमों ने अब तक 10,000 घरों की जांच कर 38,000 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य का विवरण जुटाया है।

प्रशासन का दावा है कि स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन करोड़ों के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में इस तरह की लापरवाही ने व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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