मध्यप्रदेश । खरगोन जिले के बड़वाह स्थित एक्वाडक्ट पुल के समीप पिछले दिनों 140 से अधिक तोतों की रहस्यमयी मौत के मामले में प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मृत तोतों का विसरा जांच के लिए भोपाल और जबलपुर की प्रयोगशालाओं में भेजा गया है, ताकि उनकी मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
घटना के बाद वन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। एहतियात के तौर पर एक्वाडक्ट पुल की रेलिंग पर पक्षियों के लिए भोजन डालने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। वन विभाग का प्रारंभिक अनुमान है कि दूषित या विषाक्त भोजन के कारण तोतों की मौत हो सकती है।
स्थिति पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने पांच सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया है। यह टीम प्रतिदिन निर्धारित समय पर पुल का भ्रमण करेगी और लोगों को रेलिंग पर पका हुआ भोजन या अन्न डालने से रोकेगी। शुक्रवार सुबह वन विभाग की टीम ने मौके पर निरीक्षण किया, जहां राहत की बात यह रही कि किसी नए तोते का शव नहीं मिला।
निरीक्षण के दौरान डिप्टी रेंजर एच.एस. सिसौदिया ने सुबह सैर पर निकले लोगों और पक्षी प्रेमियों को समझाइश दी। उन्होंने बताया कि लगातार तोतों के शव मिलने से यह आशंका है कि पक्षियों ने विषाक्त भोजन खा लिया है। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक किसी भी प्रकार का खाद्यान्न पक्षियों को न डालने की अपील की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने पर वन विभाग द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
वहीं पशु विभाग के डॉ. जितेंद्र सेते ने भी अपनी टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने आमजन को जागरूक करते हुए कहा कि पक्षियों को पका हुआ या बासी भोजन नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें फूड प्वाइजनिंग का खतरा होता है। पक्षियों के लिए केवल कच्चा अनाज ही सुरक्षित और उपयुक्त होता है। दोनों विभागों की टीमें आगामी तीन से चार दिनों तक लगातार भ्रमण कर लोगों को जागरूक करेंगी।
इस बीच पशु चिकित्सक डॉ. सेते ने इस मामले को लेकर गंभीर आशंका जताई है। उनका कहना है कि यह घटना सामान्य फूड प्वाइजनिंग की नहीं, बल्कि जानबूझकर जहर देने की भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि एक्वाडक्ट पुल के आसपास सैकड़ों तोतों का बसेरा वर्षों से है और लोग लंबे समय से उन्हें दाना डालते आ रहे हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मौत का यह पहला मामला है। जहर इतना अधिक प्रभावी था कि कई तोते पेड़ की शाखाओं पर बैठे-बैठे ही मर गए। इससे प्रतीत होता है कि किसी ने जानबूझकर विषाक्त पदार्थ खिलाया है। डॉ. सेते ने वन विभाग से इस दिशा में विस्तृत और गहन जांच की मांग की है, ताकि इस रहस्यमयी घटना की सच्चाई सामने आ सके।



