Vedant Samachar

एविएशन सेक्टर में बड़ा डिजिटल कदम, eGCA ऐप पर मिलेगा ATPL

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अब एयरलाइन पायलटों को कागज़ी लाइसेंस साथ रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस (ATPL) के लिए इलेक्ट्रॉनिक पर्सनल लाइसेंस (EPL) सेवा शुरू कर दी है. इसका मतलब है कि अब पायलटों का लाइसेंस मोबाइल फोन में डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा, जिसे कभी भी और कहीं भी दिखाया और सत्यापित किया जा सकेगा.

ATPL वह लाइसेंस होता है जो बड़े यात्री विमानों के कैप्टन पायलट के पास अनिवार्य रूप से होता है. DGCA ने इसे डिजिटल बनाने का फैसला इसलिए लिया है ताकि फर्जी लाइसेंस की संभावना खत्म हो, दस्तावेज़ों में छेड़छाड़ रोकी जा सके और एयरपोर्ट अथॉरिटी या एयरलाइन किसी भी समय तुरंत लाइसेंस की जांच कर सके.

eGCA मोबाइल ऐप के जरिए एक्सेस किया जा सकता लाइसेंस
यह डिजिटल लाइसेंस eGCA मोबाइल ऐप के जरिए एक्सेस किया जा सकता है. DGCA के अनुसार, यह सिस्टम अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है और इसमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स जोड़े गए हैं, जिससे लाइसेंस की असलियत तुरंत वेरिफाई की जा सकती है.

दरअसल, DGCA ने फरवरी 2025 में ही डिजिटल लाइसेंस की शुरुआत कर दी थी. उस समय यह सुविधा कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) और फ्लाइट रेडियो टेलीफोन ऑपरेटर लाइसेंस (FRTOL) के लिए लागू की गई थी. अब ATPL को भी इसमें शामिल कर लेने से यह पूरी व्यवस्था और अधिक मजबूत हो गई है.

पूरे सिस्टम में बढ़ेगी पारदर्शिता
इस पहल को एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ा सुधार माना जा रहा है. इससे पायलटों को लाइसेंस संभालकर रखने की चिंता से राहत मिलेगी, एयरलाइंस और अधिकारियों के लिए जांच प्रक्रिया आसान होगी और पूरे सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी. साथ ही, कागज़ी प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम होगी और कामकाज ज्यादा डिजिटल और तेज़ बनेगा.

DGCA का कहना है कि इस डिजिटल पहल से एविएशन सेक्टर में सेवा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और भरोसा तीनों बेहतर होंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा और भारतीय विमानन व्यवस्था की विश्वसनीयता को मजबूत करता है.

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