Vedant Samachar

“खाकी से रंग स्कूल के संग” सहित नवाचारों से बनाई अलग पहचान, भोजराम पटेल बने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

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मुंगेली/कोरबा, 25 जनवरी (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ पुलिस सेवा के 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी भोजराम पटेल को मुंगेली जिले के पुलिस अधीक्षक पद से पदोन्नत कर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बनाया गया है। उनकी पदोन्नति पर पुलिस विभाग सहित शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग एवं बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने उन्हें कॉलर बैच लगाकर सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

भोजराम पटेल मूल रूप से रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम तारापुर के निवासी हैं। साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन के बल पर उच्च पद तक पहुंचने का प्रेरणादायक सफर तय किया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिक्षाकर्मी के रूप में की थी। शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हुए ही उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी की और 23 दिसंबर 2013 को भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए।

आईपीएस चयन के पश्चात उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, हैदराबाद से प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण उपरांत उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में रायपुर जिले में हुई, जहां उन्होंने धरसींवा थाना प्रभारी के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ आम जनता से संवाद स्थापित कर एक संवेदनशील और जनोन्मुखी अधिकारी की पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने दुर्ग जिले में सीएसपी के रूप में सेवाएं दीं तथा राज्यपाल के एडीजी (परिसर) के रूप में पदस्थ रहते हुए सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुलिस अधीक्षक के रूप में उनकी पहली पोस्टिंग कांकेर जिले में हुई, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच उन्होंने कानून-व्यवस्था संभालते हुए पुलिस और जनता के बीच विश्वास कायम किया। इसके बाद वे गरियाबंद, कोरबा, महासमुंद और अंत में मुंगेली जिले के पुलिस अधीक्षक रहे। प्रत्येक जिले में उनकी कार्यशैली और नवाचारों ने अलग पहचान बनाई।

कोरबा जिले में एसपी रहते हुए उन्होंने पुलिसकर्मियों के मानसिक और पारिवारिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए साप्ताहिक अवकाश व्यवस्था लागू की। इसके साथ ही कोरबा छत्तीसगढ़ का पहला जिला बना, जहां पुलिस बल को साप्ताहिक अवकाश की सुविधा मिली। महासमुंद जिले में पदस्थ रहते हुए उन्होंने ‘खाकी के रंग स्कूल के संग’ नामक अभिनव अभियान की शुरुआत की, जिसके माध्यम से स्कूली बच्चों को साइबर अपराध, साइबर ठगी और ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। मात्र दो माह में इस अभियान से 20 हजार से अधिक बच्चे जुड़े और इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया, जिसे प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।

गरियाबंद जिले में उन्होंने ‘छइयां’ अभियान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य पुलिस और ग्रामीणों के बीच की दूरी कम करना था। इस पहल के तहत पुलिसकर्मी गांवों में जाकर ग्रामीणों के साथ संवाद करते, उनकी समस्याएं सुनते और समाधान के प्रयास करते थे। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस अभियान से पुलिस के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा और पुलिस की छवि मित्रवत संस्था के रूप में उभरी।

मुंगेली जिले में एसपी रहते हुए भोजराम पटेल ने ‘पहल’ नामक व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किया। इसके अंतर्गत साइबर सुरक्षा, नशामुक्ति, यातायात नियम, पॉक्सो एक्ट और व्यक्तिगत सुरक्षा जैसे विषयों पर स्कूली छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों को जागरूक किया गया। नवंबर 2025 तक अभियान के प्रथम चरण में 50 हजार से अधिक छात्र और 35 हजार से अधिक नागरिक लाभान्वित हुए। इसी अभियान से मिली जागरूकता के कारण एक छात्रा साइबर ठगी का शिकार होने और आत्मघाती कदम उठाने से बच सकी, जो इसकी सफलता का जीवंत उदाहरण है।

‘पहल’ अभियान के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण किया गया, जिसमें रक्षित केंद्र में 27 नक्षत्रों के पौधे लगाए गए। सड़क सुरक्षा को लेकर हेलमेट रैलियों का आयोजन कर लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया। समाज की बुनियादी कड़ी माने जाने वाले कोटवारों को आधुनिक पुलिसिंग से जोड़ा गया, महिलाओं को उनके अधिकारों और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया गया तथा बुजुर्गों के लिए ‘सियान’ कार्यक्रम के माध्यम से सुरक्षा और भरोसे का माहौल बनाया गया।

भोजराम पटेल छत्तीसगढ़ी राजभाषा और स्थानीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा में गीत जारी कर सांस्कृतिक पहचान को मजबूती दी, जिससे युवाओं में स्थानीय भाषा और संस्कृति के प्रति जुड़ाव बढ़ा।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पद पर पदोन्नति के साथ अब भोजराम पटेल को और व्यापक स्तर पर प्रशासनिक, रणनीतिक और सामुदायिक पुलिसिंग की जिम्मेदारियां निभानी होंगी। उनकी कार्यशैली, नवाचार और जनसंवाद को देखते हुए पुलिस विभाग के साथ-साथ आम जनता को भी उनसे भविष्य में और अधिक सकारात्मक बदलावों की उम्मीद है।

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