कोरबा,02 अप्रैल 2026। देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी Coal India Limited (सीआईएल) वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपने निर्धारित उत्पादन एवं डिस्पैच लक्ष्य को हासिल करने में असफल रही। कंपनी ने जहां 875 मिलियन टन (एमटी) उत्पादन का लक्ष्य रखा था, उसके विरुद्ध केवल 768.11 एमटी उत्पादन ही कर सकी। इसी प्रकार 900 एमटी डिस्पैच लक्ष्य के मुकाबले कंपनी 739.35 एमटी कोयले का ही डिस्पैच कर पाई।
स्थिति और चिंताजनक तब नजर आती है जब पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों से तुलना की जाती है। उस वर्ष सीआईएल ने 781.075 एमटी उत्पादन किया था, जबकि 2025-26 में यह आंकड़ा लगभग 13 एमटी घटकर 768.11 एमटी पर आ गया। यानी कंपनी न केवल लक्ष्य से चूकी, बल्कि पिछले वर्ष के प्रदर्शन को भी दोहराने में असफल रही।

सीआईएल की सहायक कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो केवल Northern Coalfields Limited (एनसीएल) ही ऐसी कंपनी रही, जिसने अपने लक्ष्य को पार किया। एनसीएल ने 140 एमटी के लक्ष्य के मुकाबले 140.5 एमटी उत्पादन कर उपलब्धि हासिल की। इसके विपरीत अन्य सभी कंपनियां अपने लक्ष्य से पीछे रह गईं।
कंपनीवार आंकड़ों के अनुसार Bharat Coking Coal Limited (बीसीसीएल) ने 46 एमटी के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 35.49 एमटी उत्पादन किया। Central Coalfields Limited (सीसीएल) 110 एमटी के लक्ष्य के विरुद्ध 82.2 एमटी पर ही सिमट गई। Eastern Coalfields Limited (ईसीएल) ने 59 एमटी के लक्ष्य के मुकाबले 52.08 एमटी उत्पादन किया।
इसी तरह Mahanadi Coalfields Limited (एमसीएल) ने 239 एमटी लक्ष्य के विरुद्ध 218.31 एमटी उत्पादन किया, जबकि South Eastern Coalfields Limited (एसईसीएल) 212 एमटी के लक्ष्य के मुकाबले 176.29 एमटी पर ही रह गई। Western Coalfields Limited (डब्ल्यूसीएल) ने भी 69 एमटी लक्ष्य के विरुद्ध 63.3 एमटी उत्पादन किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन लक्ष्य से पिछड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मौसम की बाधाएं, खनन क्षेत्रों में तकनीकी समस्याएं, भूमि अधिग्रहण में देरी तथा लॉजिस्टिक चुनौतियां शामिल हैं। इसका सीधा असर देश में कोयला आपूर्ति और ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, वित्तीय वर्ष 2025-26 में सीआईएल का प्रदर्शन अपेक्षाओं से कम रहा है, जिससे आगामी वर्षों के लिए कंपनी के सामने उत्पादन बढ़ाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
