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]]>सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाया जा रहा है कि सिलेंडर ब्लास्ट किन कारणों से हुआ। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।
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]]>20 नवंबर तक होंगे प्रतिभागियों के पंजीयन
रायपुर, 13 नवंबर 2025 I प्रकृति प्रेमियों और तितली विशेषज्ञों के लिए इस दिसंबर एक अद्भुत अनुभव का अवसर आने वाला है। राज्य शासन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘कांगेर वैली बटरफ्लाई मीट 2025’ का आयोजन 5 से 7 दिसंबर 2025 तक सुरम्य कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में किया जा रहा है।
बस्तर की इस रहस्यमयी घाटी को ‘जंगल का जीवित काव्य’ कहा जाता है, जहाँ सदियों पुराने वृक्ष समय की कहानियाँ फुसफुसाते हैं और तितलियाँ अपने रंगीन पंखों से प्रकृति के कैनवास पर नई कविताएँ रचती हैं। इस आयोजन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को जंगल की लय में खो जाने, वन्यजीवों के बीच जीवन की नजदीकी को महसूस करने और तितलियों की अद्भुत विविधता को देखने का सुनहरा मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप इस आयोजन से वन्यजीव प्रेमियों को प्रकृति का लुफ्त उठाने का मौका मिलेगा और बस्तर पर्यटन को भी नया आयाम प्राप्त होगा।
उक्त तीन दिवसीय शिविर का उद्देश्य तितलियों के अध्ययन, पहचान और संरक्षण के महत्व को समझना और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना है। इस शिविर के पहले दिन प्रतिभागियों का पंजीकरण जगदलपुर स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान कार्यालय में किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें निर्धारित वन शिविरों में भेजा जाएगा। दूसरे दिन तितलियों की विभिन्न प्रजातियों के प्रलेखन पर केंद्रित फील्ड ट्रेल्स का आयोजन किया जाएगा, जहाँ विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रतिभागी जंगल के रास्तों पर चलते हुए तितलियों की जीवनशैली को नजदीक से देख सकेंगे। अंतिम दिन सभी प्रतिभागी आधार शिविर में अपने अनुभव साझा करने सहित तस्वीरें और डेटा प्रस्तुत करेंगे । इस आयोजन में वही लोग भाग ले सकेंगे जो शारीरिक रूप से स्वस्थ हों और जंगल की परिस्थितियों में प्रतिदिन 12 से 15 किलोमीटर पैदल चलने में सक्षम हों। प्रतिभागियों के पास तितलियों की पहचान का बुनियादी ज्ञान होना आवश्यक है, जबकि गंभीर चिकित्सकीय स्थितियों वाले व्यक्तियों को आवेदन न करने की सलाह दी गई है।
पंजीकरण की अंतिम तिथि 20 नवंबर निर्धारित की गई है, वहीं चयनित प्रतिभागियों को 22 नवंबर तक सूचना दी जाएगी। शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि 25 नवंबर होगी। पंजीकरण शुल्क व्यक्तियों के लिए 2000 रूपए और छात्रों के लिए 1500 रूपए रखा गया है, जिसमें आवास और संरक्षण गतिविधियों में योगदान शामिल है। हालांकि यातायात का खर्च प्रतिभागियों को स्वयं वहन करना होगा।
वन विभाग ने प्रतिभागियों के लिए कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। सभी को जंगल के नियमों का पालन करना होगा, वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखनी होगी और किसी भी प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना होगा। शिविर के दौरान धूम्रपान, शराब और सुगंधित उत्पादों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। दिसंबर के ठंडे मौसम को ध्यान में रखते हुए गर्म कपड़े साथ रखने की भी सलाह दी गई है। प्रकृति और तितलियों के इस अनोखे संगम में भाग लेने के इच्छुक लोग दिए गए क्यूआर कोड या लिंक के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। किसी भी सहायता के लिए व्हाट्सएप पर +91-84355 62061 या +91-82530 44935 पर संपर्क किया जा सकता है।
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