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]]>चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि गंभीर विषयों पर जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं को निर्धारित सुरक्षा राशि जमा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सुनवाई के बाद यह पाया जाता है कि याचिका वास्तव में जनहित में थी, तो सुरक्षा राशि वापस की जा सकती है।
5 हजार से बढ़ाकर 15 हजार की गई राशि दरअसल, पहले हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाने पर 5 हजार रुपए सुरक्षा राशि जमा करनी होती थी, जिसे कुछ समय पहले हाईकोर्ट ने संशोधित कर 15 हजार रुपए कर दिया है। यानी कि नए नियम के अनुसार याचिककर्ताओं को तीन गुना अधिक शुल्क जमा करना होगा।
DMF में अनियमितता का आरोप बता दें कि कोरबा जिले के लक्ष्मी चौहान, अरुण श्रीवास्तव और सपूरन दास की ओर से DMF में अनियमितता को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील ने दलील दी कि पहले यह राशि कम थी और अब तीन गुना बढ़ा दी गई है, इसलिए इसमें छूट दी जाए। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि पिछले 10 वर्षों में DMF के तहत करीब 4000 करोड़ रुपए के उपयोग में नियमों और गाइडलाइन का उल्लंघन किया गया। याचिका में प्रभावितों को नौकरियों में अवसर न देने, मनमाने तरीके से भवन निर्माण पर खर्च करने और कई पात्र परिवारों को लाभ से वंचित रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
12 जनवरी को होगी केस की सुनवाई हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता अगले शुक्रवार तक 15 हजार रुपए की सुरक्षा राशि जमा करें। इसके बाद 12 जनवरी को जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा में राशि जमा नहीं की गई, तो याचिका स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
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