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]]>कोरबा,07 जनवरी (वेदांत समाचार)। देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से 1 नवंबर 1975 को स्थापित कोल इंडिया लिमिटेड ने अपने 50 वर्षों के कार्यकाल में कोयला उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। हालांकि इस दौरान स्थायी रोजगार में लगातार गिरावट आई है और ठेका प्रथा पर निर्भरता बढ़ती गई है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1995 में कोल इंडिया का कोयला उत्पादन 237 मिलियन टन था, उस समय कंपनी में लगभग 6.40 लाख स्थायी कर्मचारी कार्यरत थे। वहीं वर्ष 2024-25 में उत्पादन बढ़कर 773 मिलियन टन तक पहुंच गया है, लेकिन स्थायी कर्मचारियों की संख्या घटकर लगभग 2.20 लाख रह गई है। इस अवधि में स्थायी कार्यबल में करीब 65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
ठेका मजदूरों की संख्या स्थायी कर्मचारियों से अधिक
स्थायी कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए कोल इंडिया की सहायक कंपनियों में ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया गया है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) में वर्तमान में लगभग 44 हजार स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि ठेका मजदूरों की संख्या 1 लाख 7 हजार से अधिक बताई जा रही है। इससे उत्पादन प्रक्रिया में अस्थायी श्रम की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।
SECL द्वारा अब तक लगभग 1 लाख 85 हजार 575 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। इसके एवज में मिलने वाले रोजगार को लेकर स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही है। जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में अधिग्रहित भूमि के बदले करीब 1200 लोगों को रोजगार प्रदान किया गया, जबकि सीधी भर्ती के माध्यम से लगभग 1300 युवाओं को नौकरी मिली।
गेवरा–दीपका–कुसमुंडा क्षेत्र में कृषि भूमि घटी
एशिया की बड़ी कोयला परियोजनाओं में शामिल गेवरा, दीपका और कुसमुंडा क्षेत्रों में खनन के चलते अब तक लगभग 7805 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हो चुकी है। इसके अलावा आने वाले समय में करीब 5000 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव भी है। इससे खेती योग्य भूमि में लगातार कमी दर्ज की जा रही है।
गेवरा परियोजना में गांवों का विस्थापन
गेवरा क्षेत्र में खनन गतिविधियों के कारण 20 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं। विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर बुनियादी सुविधाओं की कमी की बात सामने आ रही है।
आवास प्रबंधन में अनियमितता
कोल इंडिया के पास कुल लगभग 3.80 लाख आवास उपलब्ध हैं, जबकि कर्मचारियों की संख्या करीब 2.20 लाख है। गेवरा क्षेत्र में उपलब्ध 3200 आवासों में से लगभग 250 पर अवैध कब्जे की जानकारी सामने आई है। इन आवासों में बिजली और पानी की आपूर्ति कंपनी द्वारा किए जाने से राजस्व पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
ठेका श्रमिकों की सुरक्षा और वेतन का मुद्दा
ठेका श्रमिकों से उत्पादन से जुड़ा कार्य लिया जा रहा है, लेकिन वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाओं के मामले में स्थायी कर्मचारियों की तुलना में अंतर बना हुआ है। इस विषय को लेकर श्रमिक संगठनों और विस्थापित संगठनों द्वारा समय-समय पर मांग उठाई जाती रही है।
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