रायपुर,14नवंबर (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू होने से पहले ही सरकारी सिस्टम बुरी तरह लड़खड़ा गया है। 12 दिन से हड़ताली सहकारी समिति कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटरों की गैरहाज़िरी ने खरीदी प्रक्रिया को अधर में लटका दिया है। इसी बीच सरकार ने बिना अनुभव वाले विभागीय कर्मचारियों और अफसरों को अचानक उपार्जन केंद्रों पर बैठाकर वैकल्पिक व्यवस्था का ढोल पीटना शुरू कर दिया है, पर बड़ा सवाल यह है कि क्या ये नए कर्मचारी ऑनलाइन धान खरीदी जैसे जटिल और हाई-टेक सिस्टम को संभाल भी पाएंगे? जिला सहकारी बैंक के सीईओ से लेकर विपणन अधिकारी तक पूरी तैयारी की पोल खुल रही है और किसानों का धैर्य टूटने लगा है।
धान खरीदी का कार्य 15 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सुचारू और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने हेतु जिलों में तैयारियां की गई है। जिलों में विभिन्न प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (लैंपस) पर धान खरीदी के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है। यह तैनाती सहकारिता विभाग के निर्देशों के अनुपालन में की गई है। इस आदेश के तहत कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, बैंक सुपरवाइजर और अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारियों को उनके मूल कर्तव्यों के साथ ही जिले के अलग-अलग धान उपार्जन केंद्रों पर अस्थायी रूप से संलग्न किया गया है।
वैकल्पिक कर्मियों के भरोसे खरीदी कैसे होगी संभव
धान खरीदी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, और सिस्टम की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। 12 दिनों से सहकारी समिति कर्मचारी और खरीदी ऑपरेटर हड़ताल पर हैं, जिनके बिना धान खरीदी की प्रक्रिया चल पाना लगभग असंभव है। इसके बावजूद सरकार वैकल्पिक कर्मचारियों के भरोसे खरीदी शुरू कराने की जिद पर अड़ी है, और इसी फैसले ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रदेश के अधिकांश जिलों में राजस्व, कृषि, खाद्य और सहकारिता विभाग के कर्मचारियों को धान खरीदी प्रभारी बनाकर ट्रेनिंग दी गई है।
प्रशासन का दावा है कि “140 केंद्र तैयार हैं, नए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे दिया गया है।” लेकिन सवाल इससे कहीं बड़े हैं कि क्या कुछ घंटों में प्रशिक्षित कर्मचारी यह समझ पाएंगे कि ऑनलाइन पोर्टल, किसान पंजीयन, तौल-पर्ची, गुणवत्ता ग्रेडिंग और भुगतान मैपिंग कैसे चलती है? यह काम अनुभव मांगता है, न कि केवल निर्देश।
ऑनलाइन धान खरीदी, नए कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
दरअसल धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल है, इसीलिए विशेषज्ञों के अनुसार
सिस्टम लॉगिन, किसान कोड मिलान, QR आधारित टोकन, वजन-अनुमोदन, ऑनलाइन पेमेंट फ़ॉरवर्डिंग, ये सभी एक दिन में सीखी जाने वाली प्रक्रियाएं नहीं हैं। अगर नए कर्मचारी तकनीकी प्रक्रिया में उलझे तो इसका सीधा नुकसान किसानों को होगा। बहरहाल धान खरीदी शुरू होने के लिए कुछ ही घंटे शेष रह गए हैं, और केंद्रों में आधी अधूरी तैयारियों के बीच किस तरह खरीदी होगी, यह देखना अभी बाकी है।



