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राजधानी में भूमि घोटाले का विस्फोट: पं. विद्याचरण शुक्ल की ऐतिहासिक कंपनी की करोड़ों की जमीन धोखाधड़ी का शिकार

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सवाल: FIR में देरी क्यों? क्या पुलिस प्रशासन बड़े आर्थिक अपराधों की तत्काल रोकथाम के लिए गंभीर नहीं?

रायपुर,13 नवंबर (वेदांत समाचार ) (विशेष संवाददाता) – 13 नवंबर 2025: राजधानी रायपुर में एक बड़ा भूमि धोखाधड़ी घोटाला सामने आया है, जिसके तार सीधे दिवंगत केंद्रीय मंत्री पंडित विद्याचरण शुक्ल से जुड़ी 72 वर्ष पुरानी कंपनी आलविन कूपर उर्फ कपूर प्रा. लि. से जुड़े हैं। कंपनी की डायरेक्टर श्रीमती माधवी पांडे ने दिनांक (11/11/2025) पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को शिकायत सौंपकर दो व्यक्तियों पर फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों की संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है, लेकिन हैरत की बात यह है कि इस गंभीर आर्थिक अपराध पर अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है।


​कंपनी का आरोप: कर्मचारी बना स्वामी, जमीन हुई ‘गायब’


​मामला रायपुर के मौजा ग्राम रायपुरा की 0.809 हेक्टेयर (लगभग दो एकड़) जमीन से जुड़ा है। कंपनी के अनुसार, आरोपी विजय बारमेड़ा, जो एक पूर्व कर्मचारी था, उसने धोखाधड़ी की नींव रखी।
​बारमेड़ा को फर्म की ओर से सिर्फ हस्ताक्षर के लिए अधिकृत किया गया था, पर उसने झूठा शपथ पत्र देकर खुद को संपत्ति का मालिक घोषित कर दिया।


​इसके बाद, बारमेड़ा ने आरोपी आलोक देवांगन को मुख्त्यारआम दिया। देवांगन ने अपनी ही फर्म ‘मीना राम डेव्हलपर्स’ (शिकायत में ‘भीना राम डेव्हलपर्स’) को यह जमीन 1 करोड़ 17 लाख रुपये में बेच दी।


​श्रीमती पांडे ने शिकायत में स्पष्ट किया है कि यह बिक्री पूरी तरह से कूटरचित दस्तावेजों पर आधारित है, जिसमें कंपनी के मालिकाना हक को दरकिनार किया गया है और विजय बारमेड़ा के पास जमीन बेचने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।


पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप
​शिकायत लेकर थाना डी.डी. नगर पहुँचने पर, थाना प्रभारी ने शिकायत लेने से ही मना कर दिया। इस घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।


​”यह संगठित धोखाधड़ी है। जब हम स्वयं दस्तावेजी साक्ष्य के साथ पुलिस के पास जा रहे हैं, और मामला पूर्व केंद्रीय मंत्री की ऐतिहासिक कंपनी से जुड़ा है, तो FIR दर्ज न करना चौंकाने वाला है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे पुलिस बड़े आर्थिक अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है।” –

कंपनी डायरेक्टर, श्रीमती माधवी पांडे


​ने BNS के तहत तत्काल कार्रवाई की मांग की है ​इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, कंपनी ने धोखाधड़ी कूटरचना के तहत आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के अंतर्गत तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है।
​ मांग है:


​वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इस गंभीर शिकायत को अपने संज्ञान में लें।
​आरोपी विजय बारमेड़ा और आलोक देवांगन को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
​इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच शुरू की जाए ताकि इस धोखाधड़ी में शामिल अन्य लोगों का भी पता चल सके।
​यह मामला छत्तीसगढ़ में भूमि माफिया और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग पर एक स्पष्ट संदेश भेजने का अवसर है। ​

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