नई दिल्ली,06नवंबर : केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी घोषणा करते हुए आठवें वेतन आयोग का गठन कर दिया है। इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। आयोग को अगले 18 महीनों में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी होंगी। इसका सीधा असर लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों की आय पर पड़ेगा।
आयोग का दायरा केंद्र सरकार के कर्मचारियों की मौजूदा सैलरी, भत्तों और अन्य सुविधाओं की व्यापक समीक्षा करना है। इस बार सरकार चाहती है कि वेतन वृद्धि केवल महंगाई भत्ते या वरिष्ठता के आधार पर न होकर, कर्मचारियों के प्रदर्शन यानी परफॉर्मेंस पर भी निर्भर करे। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी ढांचे में परफॉर्मेंस आधारित सैलरी लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि सभी पदों की जिम्मेदारियां अलग-अलग होती हैं।
वेतन आयोग के प्रमुख बिंदुओं में फिटमेंट फैक्टर अहम भूमिका निभाता है, जिससे बेसिक सैलरी तय की जाती है। फिलहाल न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 है, जिस पर 58% महंगाई भत्ता जोड़ने के बाद कुल सैलरी लगभग ₹28,440 होती है। अगर आयोग फिटमेंट फैक्टर को 2.0 तय करता है, तो बेसिक सैलरी ₹36,000 तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह फैक्टर 1.83 से 2.46 के बीच रह सकता है। अगर इसे 2.46 तक बढ़ाया गया, तो कर्मचारियों की सैलरी में करीब 55% तक की बढ़ोतरी संभव है। इसके साथ ही एचआरए, ट्रैवल और मेडिकल भत्ते भी नई बेसिक सैलरी के हिसाब से बढ़ेंगे।
आठवें वेतन आयोग का लाभ न केवल केंद्रीय कर्मचारियों बल्कि केंद्र सरकार के औद्योगिक व गैर-औद्योगिक कर्मचारी, रक्षा बलों के सदस्य, अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS) के अधिकारी, केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी, ऑडिट विभाग और न्यायिक सेवा के कर्मियों को भी मिलेगा।
पेंशनभोगियों के लिए भी यह आयोग राहत लेकर आ सकता है। आयोग NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) और पुरानी पेंशन व्यवस्था, दोनों की समीक्षा करेगा। खासतौर पर एनपीएस से जुड़े कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी और डेथ बेनिफिट नियमों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। कर्मचारी अब इस उम्मीद में हैं कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद उनकी सैलरी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।



