Vedant Samachar

लगातार बढ़ रहे H3N2 फ्लू के केस, इन लोगों को ज़्यादा खतरा

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देशभर में H3N2 फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. यह इन्फ्लुएंजा वायरस का एक प्रकार है, जो सामान्य फ्लू जैसा लगता है लेकिन इसके लक्षण अधिक लंबे समय तक रह सकते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि इस वायरस से प्रभावित लोगों में तेज़ बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश और शरीर में दर्द जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं. हालांकि यह ज़्यादातर मामलों में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ खास लोगों के लिए यह ज़्यादा खतरनाक साबित हो सकता है.

किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा– H3N2 फ्लू का असर कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों पर ज्यादा होता है. बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी गंभीर बीमारी जैसे अस्थमा, डायबिटीज़ या हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों को इस वायरस से ज्यादा खतरा है. अगर आपकी उम्र 5 से कम या 65 से अधिक है तो विशेष ख्याल रखें. इन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) सामान्य से कम होती है, इसलिए संक्रमण जल्दी पकड़ लेता है और गंभीर रूप ले सकता है.

H3N2 फ्लू के लक्षण
आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि इस फ्लू के लक्षण सामान्य वायरल इंफेक्शन जैसे ही हैं, लेकिन यह लंबे समय तक रह सकते हैं. मरीजों में तेज़ बुखार, गले में खराश, खांसी, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ और लगातार थकान जैसे लक्षण पाए गए हैं. कुछ मामलों में उल्टी और डायरिया भी देखने को मिलते हैं. डॉक्टरों के अनुसार अगर बुखार लगातार बना रहे और सांस लेने में दिक्कत हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

बचाव के तरीके
एक्सपर्ट्स का कहना है कि H3N2 फ्लू से बचने के लिए साफ-सफाई और सतर्कता बेहद ज़रूरी है. नियमित रूप से हाथ धोना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और बीमार व्यक्ति से दूरी बनाए रखना जरूरी है. खांसते और छींकते समय मुंह ढकना, और इस्तेमाल किए गए टिश्यू को सही तरीके से फेंकना संक्रमण को फैलने से रोकता है. इसके अलावा, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और हल्का व्यायाम इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं. हर साल फ्लू का टीका लगवाएं, बेहतर होगा कि सर्दी आने से पहले लगवाएं.

कब लें डॉक्टर की मदद?
अगर किसी व्यक्ति को कई दिनों तक तेज बुखार बना रहे, लगातार खांसी और सांस फूलने की समस्या हो, तो इसे हल्के में न लें. डॉक्टर की सलाह पर दवा और जरूरत पड़ने पर टेस्ट करवाना बेहद जरूरी है. खासकर गर्भवती महिलाओं, बुज़ुर्गों और बच्चों के मामले में तुरंत मेडिकल सहायता लेना चाहिए.

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