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KORBA: गोड़वंशीय राजाओं का गढ़ है मातिन, आसन स्वरूप में पूजी जाती हैं देवी…पहाड़ की 2000 फीट ऊंची चोटी पर है देवी माँ का आस्था स्थल

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  • आदिवासी समाज की है गहरी आस्था, नवरात्र पर लगता है मेला


कोरबा, 01 अक्टूबर (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ के 36 में से 5 गढ़ कोरबा जिला में स्थित हैं। जिसमे कोरबा गढ़, कोसगाई गढ़, लाफा गढ़, पोड़ी व मातिन स्थित हैं। इन सभी गढ़ों की विशेषता यह है कि हर गढ़ में आदिशक्ति मां देवी किसी न किसी रूप में विराजमान होकर अपने भक्तों की रक्षा करती आ रही हैं।


यही कारण है कि इन देवियों के प्रति आज भी लोगों की गहरी आस्था बनी हुई है। 5 गढ़ में एक मातिन गढ़ पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम तुमान व जटगा के बीच ग्राम पचरा के समीप है। इस गढ़ का इतिहास यह है कि रतनपुर (बिलासपुर) में 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच शासन करने वाले गोड़वंशीय राजाओं ने अपने कार्यकाल में इसका निर्माण कराया था। शासकों ने अपनी व प्रजा की रक्षा के लिए पहाड़ के किले पर मातिन के नाम से दाई मंदिर का भी निर्माण उसी समय कराए थे। इस मंदिर तक पहुंचने 2000 फीट पहाड़ी रास्तों को तय करना पड़ता है। बताया जाता है कि मातिन रियासत में तब 84 गांव शामिल थे। आदिवासी शक्तिपीठ के निर्मल सिंह राज के अनुसार मंदिर में मां मातिन दाई की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि आसन की पूजा होती है। गोड़ समाज के जगत गोत्र के लोगों को उनका पूर्वज माना जाता है। आदिवासी समाज का मां मातिन दाई पर गहरी आस्था है। यहां हर साल नवरात्र के समय मेला लगता है।

आस्था स्थल जाने के तीन चौथाई हिस्से में नहीं है रास्ता
मां मातिन दाई मंदिर जाने कुछ दूर तक ही सीढ़ियां बनी हैं। इसके बाद तीन चौथाई हिस्से में लोगों के आवागमन से रास्ता बन चुका है। पथरीली पहाड़ियों पर बनी पगडंडी पर चलने के दौरान थोड़ी भी लापरवाही बरती गई तो उसका परिणाम अच्छा नहीं होगा, क्योंकि पहाड़ी सीधी होने के कारण चढ़ाई कठिन होती है। यहां पहुंचने कटघोरा से अंबिकापुर मार्ग पर स्थित ग्राम गुरसिया से बायीं तरफ जाने पक्की सड़क है।

इनके लिए चढ़ाई कोई मुश्किल नहीं
पहाड़ के ऊपर मंदिर में जल की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए ग्राम के दो लोग नियमित कांवर में पानी लेकर मंदिर तक पहुंचाते हैं। साथ ही मंदिर में पूजा करने वाले बैगा भी हैं, जो सुबह मंदिर जाते हैं और शाम को पूजा करने के बाद पहाड़ से नीचे उतर आते हैं। इन लोगों को मंदिर की चढ़ाई चढ़ते देखने से ही प्रतीत होता है कि उनके लिए मंदिर की चढ़ाई कोई मुश्किल नहीं है।

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