राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से दशकों से जुड़े बिलासपुर का गोरे परिवार संगठन के लिए निष्ठा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस परिवार ने नौकरी छोड़ने जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद संघ का साथ नहीं छोड़ा। छत्तीसगढ़ में संघ को मजबूत नींव दी। संघ प्रमुख मोहन भागवत शनिवार को परिवार के घर भोजन करने पहुंचे।
दरअसल, संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत काशीनाथ गोरे स्मृति स्मारिका का विमोचन करने बिलासपुर आए थे। भागवत ने कहा कि जिस प्रकार दीये स्वयं जलकर रोशनी देता है, ऐसी ही तपस्या 100 साल से स्वयंसेवकों ने की है।
सभी विविधताओं को साथ लेकर चलना ही धर्म है। इसे सभी को समझना होगा और यह विचार करना होगा कि हम अपने जीवन में क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आप में ऐसा सद्गुण होना चाहिए कि लोग आपकी ओर खींचे चले आएं।
बता दें कि काशीनाथ गोरे के पिता यशवंत नरहर गोरे, बड़े पिता और चाचा तीनों संघ से जुड़े थे। सक्रिय भूमिका निभाते रहे। पिता रेलवे की नौकरी में थे, लेकिन जब कांग्रेस सरकार के दबाव और प्रताड़ना के चलते नौकरी खतरे में आई, तो उन्होंने रेलवे की स्थायी नौकरी छोड़ दी। परिवार का गुजारा किराना दुकान से हुआ, लेकिन संघ का काम जारी रहा।



