ओडिशा,19अगस्त । केंद्रापाड़ा ज़िले के औल क्षेत्र के एकमानिया गांव में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां तीन परिवारों की 73 भैंसें नदी पार करते वक्त डूब गईं।
घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया है और लोग इस पर तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक गांव के तीन लोग ,गणेश दास, जगन्नाथ दास और पागला बिश्वाल, रोज़ की तरह अपनी करीब 90 भैंसों को चराने के लिए ले गए थे।
वापसी के समय जब भैंसें गलिया नदी पार कर रही थीं, तभी अचानक नदी का बहाव तेज हो गया। तेज बहाव में फंसकर भैंसें आगे नहीं बढ़ सकीं और एक के बाद एक डूबने लगीं। देखते ही देखते 73 भैंसों की जान चली गई।
गांव वालों ने जताई ये आशंका
इस घटना के बाद गांव वालों में कई तरह के शक भी पैदा हो गए हैं। एक साथ इतनी भैंसों की मौत होना लोगों को सामान्य नहीं लग रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि शायद नदी का पानी जहरीला हो गया हो।
गांव वालों को यह भी शक है कि पास के इलाके में झींगा और मछली पालन के लिए भारी मात्रा में कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। हो सकता है कि वही कीटनाशक पानी में मिल गया हो और भैंसों ने जब वह पानी पिया, तो वे जहर का शिकार हो गईं।
घटना की जानकारी मिलते ही एक वेटनरी डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। भैंसों का पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है ताकि सही वजह सामने आ सके। अभी तक मौत का असली कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन जांच जारी है।
पशु संसाधन विभाग के एडिशनल डायरेक्टर का सामने आया बयान
पशु संसाधन विभाग के एडिशनल डायरेक्टर गिरधारी भोई ने कहा, “हमारे डॉक्टर की टीम घटनास्थल पर गई थी। मेरे साथ केंद्रपाड़ा के मुख्य जिला पशु चिकित्सा अधिकारी, उनकी टीम और एनिमल डिजीज लैबोरेटरी के साइंटिस्ट भी मौजूद थे।
हमनें 2 भैंसों का पोस्टमार्टम भी किया है और उनके नमूनों को इकठ्ठा कर लिया गया है। पानी में भैंसों का दबना कोई आम बात नहीं है।
प्रारंभिक रूप से हमें पता चल रहा है की नदी में एक जगह दलदल है जहां यह भैंस फंस गई होंगी, जिसकी वजह से उनकी मौत हुई होगी लेकिन हम इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह प्रारंभिक जांच के आधार पर इकठ्ठा किए गए तथ्य हैं।”
उन्होंने कहा, “नमूनों की जांच के बाद ही सच्चाई का पता चल पाएगा। हमनें पानी के नमूनों को भी इकठ्ठा किया है जिसकी जांच कराई जाएगी लेकिन प्राथमिक रूप से पानी में किसी तरह की गंदगी का पता नहीं चल रहा है।
पोस्टमॉर्टम में भैंसों के फेफड़ों की जिस तरह की हालत हुई है, ऐसी हालत डूबने से ही होती है। विभाग के मंत्री, निदेशक और सचिव से हमारी बात हुई है। हम उन परिवारों को सहायता प्रदान करने की कोशिश करेंगे जिन्होंने अपनी भैंसें खो दी हैं।”
एक साथ 73 भैंसों की मौत से गांव के किसान सदमे में हैं। इन भैंसों से ही उनका रोज़गार चलता था। अब वे पूरी तरह से टूट गए हैं। स्थानीय लोग प्रशासन से न्याय और मुआवज़े की मांग कर रहे हैं।



