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पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

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छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी भाषा-संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने वाले छत्तीसगढ़ के गौरव, सुप्रसिद्ध हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को पं. मुकुटधर पांडे साहित्य समिति द्वारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम के आरंभ में डॉ. दुबे के तैलचित्र पर उपस्थित साहित्यकारों ने पुष्पांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। सभी ने उनके साथ बिताए अविस्मरणीय पलों को स्मरण करते हुए उन्हें आत्मीय भाव से याद किया।

समिति के संरक्षक युनूस दानियालपुरी, कमलेश कुमार यादव, मुकेश चतुर्वेदी, अध्यक्ष दिलीप अग्रवाल, सचिव डॉ. के. के. चंद्रा, उपाध्यक्ष बलराम राठौर, अंजना सिंह ठाकुर व स्मिता देशपांडे ने डॉ. दुबे के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए।

यूनुस दानियालपुरी ने कहा कि कोरबा में साहित्य भवन के निर्माण और साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने में डॉ. दुबे की भूमिका उल्लेखनीय रही है।
दिलीप अग्रवाल ने राजभाषा आयोग के प्रांतीय सम्मेलन की स्मृतियों को साझा करते हुए भावुक होकर डॉ. दुबे को याद किया।
कमलेश यादव ने उनकी सरलता, सहजता और प्रभावशाली वाणी की सराहना की।
डॉ. के. के. चंद्रा ने बताया कि डॉ. दुबे को उनका “वनवासी गीत” अत्यंत प्रिय था, और वे प्रत्येक भेंट में उनसे यह गीत अवश्य गवाते थे। इस अवसर पर उन्होंने उसी गीत की भावनात्मक प्रस्तुति दी।
मुकेश चतुर्वेदी ने कहा कि जब भी डॉ. दुबे कोरबा आते थे, वे उनसे मिलते और साहित्य व समाज के विविध पहलुओं पर संवाद करते थे। कोरबा और साहित्य भवन से उनका गहरा जुड़ाव था, जिसकी पूर्ति संभव नहीं।

प्रथम सत्र का संचालन कर रहे जीतेंद्र कुमार वर्मा ‘खैरझिटिया’ ने भगवान से विनती करते हुए कहा कि, डॉ. दुबे को छत्तीसगढ़ की माटी में पुनः जन्म दें। राजभाषा आयोग के सचिव के रूप में उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा के उत्थान हेतु जो कार्य किए हैं, उसकी सबने विशेष सराहना की।

श्रद्धांजलि सभा के उपरांत एक काव्यगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें उपस्थित कवियों ने गीतों और कविताओं के माध्यम से डॉ. दुबे को श्रद्धासुमन अर्पित किए। विशेष रूप से हास्य-व्यंग्य विधा में रचनाएँ पढ़कर उन्हें याद किया गया।

हास्य रचनाएँ प्रस्तुत करने वाले कवियों में
बलराम राठौर, संतोष चौहान, जगदीश श्रीवास, उदय प्रधान, रामकृष्ण साहू, मनीष कुमार मुसाफिर, दीपक सिंह ठाकुर आदि शामिल रहे।

गोष्ठी के दौरान “पावस ऋतु” विषय पर भी कवियों ने सरस रचनाओं की प्रस्तुति दी। सहभागी कवि-कवयित्रियों में
रसीद बानो, वीणा मिस्त्री, शनि प्रधान, सरस्वती श्रीवास, रश्मि श्रीवास, राधेश्याम कुमार, नवल कुमार जोशी, कविता जैन, यामिनी मनहर, अनुसुइया श्रीवास, प्रतिभा सहारे, अंजना सिंह ठाकुर, जीतेंद्र वर्मा ‘खैरझिटिया’, हीरामणि वैष्णव, डिकेश्वर साहू, आलोक शर्मा, स्मिता देशपांडे, अर्चना साहू, प्रेमलता राठौर आदि प्रमुख रहे।

कविगोष्ठी का संचालन कविता जैन और जगदीश श्रीवास ने संयुक्त रूप से किया।

अंत में, समिति के उपाध्यक्ष बलराम राठौर ने सभी आमंत्रित अतिथियों, साहित्यकारों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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