रायपुर,02जुलाई(वेदांत समाचार) । जैन संवेदना ट्रस्ट इस वर्ष जीवदया, मानव कल्याण व साधर्मिक भक्ति का चातुर्मास मनाएगा । महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने बताया कि जियो और जीने दो भगवान महावीर स्वामी ने मूलमंत्र विश्व को दिया है। चातुर्मास काल में दया करूणा अहिंसा भाईचारा के गुणों का हमारे जीवन में विकास होना चाहिये। जैन संवेदना ट्रस्ट चातुर्मास में मूक पशु पक्षियों की सेवा, मानव सेवा के अंतर्गत श्रवण यन्त्र , कृत्रिम हाथ , कैलिपर्स , वैशाखी , बी पी नापने की मशीन , शुगर टेस्टिंग मशीन का निःशुल्क वितरण तथा मानव कल्याण में साधर्मिक भाई बहनों के स्वावलंबी जीवन , व्यवसायिक उत्थान व विवाह योजना पर कार्य करेंगे।
23 दिव्यांगों को मिले श्रवण यन्त्र
जैन चातुर्मास हेतु गुरुभगवंतों के मंगलप्रवेश अवसर पर जैन संवेदना ट्रस्ट ने बुधवार से मानव सेवा साधर्मिक भक्ति व अनुकम्पा प्रकल्प का आरम्भ किया है। ऋषभदेव जैन मंदिर प्रांगण में 23 दिव्यांगों को श्रवण यन्त्र वितरित किए गए। जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने इस अवसर पर कहा कि मानवता की सेवा जीवन का सर्वोत्तम कार्य है। जीवन भर सुनने के बाद जब बुढ़ापे में कम सुनाई देने लगता है तो बड़ी समस्या पैदा हो जाती है । इस वक़्त श्रवण यन्त्र ही बड़ा सहारा होता है। जैन संवेदना ट्रस्ट द्वारा गूंगे बहरे लोगों का परीक्षण कर श्रवण यंत्र का वितरण किया जाता है। ट्रस्ट के गुलाब दस्सानी ने बताया कि 3 बच्चों में देवकी को जन्म से सुनाई नही देता था, डॉक्टरों ने जांच कर बताया कि श्रवण यन्त्र लगाकर देवकी सुन सकती है। आज श्रवण यन्त्र लगाकर चारों बच्चे सुनने लगे हैं। सभी के माता पिता प्रफुल्लित होकर जैन समाज का आभार जताया है । जैन संवेदना ट्रस्ट के चन्द्रेश शाह व महावीर कोचर ने बताया कि चातुर्मास में 500 बुजुर्गों व बच्चों को श्रवण यन्त्र , कृत्रिम हाथ , कैलिपर्स बैशाखियों का वितरण व 200 साधर्मिक परिवारों को बी पी शुगर मशीनों का सहयोग किया जावेगा।



