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KORBA BREAKING:हनुमंत कथा आयोजन में विवाद: प्रचार को लेकर मारपीट, आयोजकों में नाराजगी

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कोरबा,30 मार्च (वेदांत समाचार)। जिले में आयोजित हनुमंत कथा जहां एक ओर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं और प्रचार-प्रसार को लेकर विवाद सामने आने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, कथा प्रारंभ होने से पहले ही आंतरिक खटपट शुरू हो गई थी, जो रविवार रात मारपीट की घटना तक पहुंच गई।

कटघोरा स्थित अग्रसेन भवन, जहां कथा वाचक पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ठहरे हुए हैं, वहां कार्यक्रम संयोजक अमरजीत सिंह और बसंत अग्रवाल के बीच विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि मामला बाबा से मुलाकात को लेकर शुरू हुआ। रात लगभग 9 बजे अमरजीत सिंह अपने साथियों के साथ अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे, जिसे बसंत अग्रवाल के समर्थकों ने रोक दिया। इस दौरान कहासुनी बढ़ी और धक्का-मुक्की के बाद मारपीट की स्थिति बन गई। आरोप है कि एक गनमैन ने भी हाथ उठा दिया, जिससे विवाद और भड़क गया।

घटना की जानकारी मिलते ही दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए और कुछ देर के लिए अग्रसेन भवन का माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालांकि बाद में मामला आपसी समझाइश से शांत करा लिया गया और पुलिस तक नहीं पहुंचा।

सूत्रों के मुताबिक, बसंत अग्रवाल पर यह आरोप लग रहा है कि उनके माध्यम से कुछ लोगों को विशेष पहुंच दी जा रही है और इसके बदले धन लेने की भी चर्चा है। वहीं आयोजन समिति के कुछ सदस्यों का कहना है कि उन्हें दरकिनार कर व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। साथ ही आयोजन से जुड़े खर्चों को लेकर भी असंतोष जताया जा रहा है।

हनुमंत कथा का आयोजन ‘अपना घर सेवा आश्रम’ द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें कार्यक्रम संयोजक अमरजीत सिंह, कार्यक्रम सचिव जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह और राणा मुखर्जी की प्रमुख भूमिका बताई जा रही है। आयोजन की तैयारियों में इनकी टीम लंबे समय से जुटी हुई थी, लेकिन अंतिम समय में नए हस्तक्षेप से असहज स्थिति पैदा हो गई है।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कथा आयोजन के दौरान कुछ लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जिसमें प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के साथ तस्वीरों वाले बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि धार्मिक आयोजन के बीच इस तरह के व्यक्तिगत प्रचार का उद्देश्य क्या है।

हालांकि विवाद फिलहाल शांत हो गया है, लेकिन आयोजन से जुड़े लोगों के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोजन समिति इस स्थिति को किस तरह संभालती है और कार्यक्रम की व्यवस्थाएं किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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