नई दिल्ली: Iran War Impact on Internet: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच पिछले एक महीने से जारी युद्ध का असर अब केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रह गया है। लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली कई समुद्री इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान ने इन केबल्स को निशाना बनाने की धमकी दी है। यदि ऐसा होता है तो भारत समेत कई देशों में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। इस खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है और अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश
दूरसंचार विभाग (DoT) ने हाल ही में टेलीकॉम और सबसी केबल ऑपरेटर्स के साथ बैठक कर उन्हें बैकअप प्लान तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। युद्ध के कारण केबल्स टूटने या उनकी मेंटेनेंस में देरी होने की आशंका है। सरकार ने कंपनियों से संभावित खतरों की समीक्षा कराने और बैकअप प्लान तैयार करने के लिए समयसीमा की जानकारी मांगी है। इसके अलावा कंपनियों ने इंटरनेट केबल की सुरक्षा के लिए ईरान के साथ बातचीत में मदद भी मांगी है।
समुद्री केबल्स का महत्व
दुनियाभर में इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए लगभग 95% डेटा समंदर में बिछाई गई केबल्स के माध्यम से जाता है। भारत में 14 लैंडिंग स्टेशनों पर 17 ऐसी केबल्स मौजूद हैं, जो चेन्नई, मुंबई, कोच्चि और तूतीकोरिन में स्थित हैं। यदि होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर की केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत के इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक रूट्स से डायवर्ट किया जा सकता है। हालांकि इससे इंटरनेट स्पीड पर असर पड़ेगा और वैकल्पिक रूट्स पर लोड बढ़ सकता है।
खतरे की मुख्य जगहें
समंदर में बिछी इंटरनेट केबल्स को वर्तमान में दो प्रमुख जगहों होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में स्थित बाब-अल-मंदाब पर सबसे ज्यादा खतरा है। युद्ध के कारण इन क्षेत्रों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का पूरा नियंत्रण है, जबकि बाब-अल-मंदाब को ईरान समर्थित हूती विद्रोही ब्लॉक करने की धमकी दे रहे हैं। लाल सागर में पहले से ही स्थिति तनावपूर्ण थी और अब युद्ध के बाद यह और जटिल हो गई है।
