कोरबा,20 जनवरी (वेदांत समाचार)। तुलसी नगर स्थित कौशिल उच्च माध्यमिक विद्यालय को लेकर उत्पन्न विवाद अब केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने कोरबा जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लगभग 35 वर्षों से शासन से मान्यता प्राप्त यह विद्यालय आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गहरा असर सैकड़ों विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिनका भविष्य असमंजस में फंस गया है।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार 05 जनवरी 2026 को कुछ लोगों द्वारा अचानक विद्यालय परिसर में प्रवेश कर तोड़फोड़ की गई। आरोप है कि इस कार्रवाई में निजी पक्ष से जुड़े लोग तथा तहसील कार्यालय से संबंधित व्यक्ति शामिल थे। इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्था में बिना पूर्व सूचना, बिना वैधानिक प्रक्रिया और बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इस प्रकार की कार्रवाई क्या उचित मानी जा सकती है।
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल परिसर में बने तनावपूर्ण माहौल के कारण पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं और मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय में छात्रों के शैक्षणिक हितों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।
मामले की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि कुछ विद्यार्थियों के अभिभावकों को फोन कर विद्यालय से नाम वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह न केवल मानसिक उत्पीड़न का मामला है, बल्कि छात्रों के शिक्षा के अधिकार का भी गंभीर उल्लंघन है। इसके अलावा, विद्यालय का खेल मैदान, जहां वर्षों से प्रार्थनाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां होती रही हैं, अब कथित रूप से असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है, जिससे छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासनिक चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। जिला शिक्षा विभाग से संपर्क करने के प्रयास किए गए, लेकिन कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी। इस चुप्पी ने आशंकाओं को और गहरा कर दिया है कि कहीं यह मामला दबाव या उदासीनता का शिकार तो नहीं हो रहा।
विद्यालय प्रबंधन और विद्यार्थियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने तक विद्यालय को सुचारु रूप से संचालित करने की अनुमति दी जाए, असामाजिक तत्वों पर सख्ती से रोक लगाई जाए और छात्रों की सुरक्षा के लिए विद्यालय को पुलिस संरक्षण प्रदान किया जाए। अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
यह विवाद केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी माना जा रहा है। यदि वर्षों से संचालित, मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान भी इस तरह की अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, तो अन्य विद्यालयों की स्थिति को लेकर भी चिंता स्वाभाविक है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन छात्रों के भविष्य को सर्वोपरि रखते हुए ठोस निर्णय लेता है या यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाता है।



