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DMF से पंचायतों को बुनियादी जरूरतों की राशि देने नए जिलाधिकारी से सरपंचों की अपेक्षित मांग, फंड के अभाव में 9 माह से उपेक्षित पड़ी है पंचायते

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0 ग्रामीणों तक नही पहुँच पा रहा योजनाओं का लाभ, उठाने लगे सरपंचों पर सवाल

कोरबा,22 दिसंबर (वेदांत समाचार)। शासन की योजनाओं को लागू करने और गांव तक पहुँचाने में ग्राम पंचायत अहम भूमिका निभाती है, लेकिन त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025- 26 सम्पन्न होने के 9 महीने बाद भी निर्वाचित सरपंच एवं पंचायत पदाधिकारी चाह कर भी अपने- अपने गांव का विकास कार्य नही करा पा रहे है, क्योंकि ग्राम पंचायतों में जब से सरपंच चुने गए है, तब से अब तक मिलने वाली 15वें वित्त एवं मूलभूत की राशि शासन से नही मिली है। जिले के सरपंचों ने नए जिलाधिकारी से पंचायतों के बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के लिए डीएमएफ से राशि जारी करने की अपेक्षित मांग रखी है।

सरपंच गांव के विकास की कुंजी होते है और वे ग्राम सभा की बैठकों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करते है, साथ ही गांव के मूलभूत आवश्यकताओं को भी पूरा करने में अहम भूमिका निभाते है।

जिससे स्थानीय समस्याएं दूर होकर जरूरतें पूरी हो सके। लेकिन ग्राम पंचायतों को 9 माह से मूलभूत और 15वें वित्त फंड नही मिलने से गांवों के मूलभूत जरूरतों में पेयजल व्यवस्था, साफ- सफाई, विद्युत व्यवस्था, सड़क- नाली मरम्मत, अतिथि शिक्षकों व चपरासी मानदेय और श्रद्धांजलि राशि, चरवाहा भुगतान सहित अन्य निर्माण/विकास के कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए है। इस वजह से पंचायतों के लोग निर्वाचित सरपंचों पर सवाल उठा रहे है। मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने और विकास कार्यो के लिए ग्राम पंचायतों को फंड नही मिलने को लेकर सरपंचों का कहना है कि यह स्थिति उन्हें केवल नाममात्र का सरपंच बना कर रख रही है।

गांवों की समस्याओं का समाधान करने के लिए उनके पास आवश्यक फंड ही नही है, जिससे छोटे- मोटे कार्य करने में भी भारी परेशानी आ रही है और विकास के कार्य रुक गए है तथा योजनाओं का लाभ आमजन तक नही पहुँच पा रहा है। इससे आम जनता भी निराश व परेशान है। ग्रामीण उनसे उम्मीद लगाए बैठे है कि गांव के मूलभूत समस्याओं का समाधान करेंगे लेकिन बजट के अभाव में जब कोई काम नही हो रहा है तो ग्रामीणों के द्वारा सवाल पूछा जाता है कि गांवों में बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त क्यों नही हो पा रही है तब पंचायतों के पास कोई ठोस जवाब नही होता। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश पनपने लगा है और विकास कार्य नही होने को लेकर कई जगह विवाद की स्थिति देखने को मिल रही है। इस हालात में अनेक सरपंच कर्ज लेकर ग्राम पंचायत के बुनियादी जरूरतों को दुरुस्त कर रहे है।

सरपंचों ने बताया कि पंचायत में जब जनप्रतिनिधि चुनकर आते है तो जनता यह अपेक्षा रखती है कि बेहतर कार्य कराया जाएगा तथा जिन आशाओं और उम्मीद के साथ उन्हें ग्रामीणों ने सरपंच चुना है उनके उम्मीदों पर खरा उतरना है, किंतु उनके सरपंच निर्वाचित होने के 9 माह बाद भी पंचायतों को मूलभूत एवं 15वें वित्त की राशि नही मिली है। ऐसे में एक तरफ सरकार जहां “सबका साथ- सबका विकास” राग अलाप करती है वहीं फंड के अभाव में पंचायतों के बुनियादी विकास और निर्माण कार्यों पर ब्रेक लग गया है।

इस मसले को लेकर जिले के अन्य जनप्रतिनिधि भी शासन- प्रशासन से पंचायतों को मूलभूत और 15वें वित्त आयोग राशि आवंटित किए जाने की मांग कर चुके है लेकिन इस ओर ध्यान नही दिया जा रहा है। ऐसे में नए जिलाधिकारी से सरपंचों की अपेक्षा है कि ग्राम पंचायतों में बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए फंड की बाधाएं दूर करते हुए डीएमएफ से राशि उपलब्ध कराएं ताकि वे आवश्यकता वाले मूलभूत सुविधाओं में सुधार कर सकें, साथ ही सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर पंचायतों के लिए 15वें वित्त एवं मूलभूत की वित्तीय मदद दिलाएं, जिससे ग्राम पंचायतें सशक्त बन सके और बुनियादी ढांचा विकसित करने की दिशा पर जोर मिल सके।

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