कर्नाटक,23 जनवरी। करीब तीन दशकों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार रहने वाला कुख्यात अपराधी आखिरकार कानून की गिरफ्त में आ गया है। कर्नाटक के मंगलुरु में वर्ष 1997 के चर्चित डबल मर्डर और लूटकांड से जुड़े दंडुपाल्या गैंग के फरार आरोपी को पुलिस ने 29 साल बाद गिरफ्तार कर लिया है।
यह गिरफ्तारी मंगलुरु पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि आरोपी लगातार पहचान बदलकर अलग-अलग राज्यों में छिपता रहा और लंबे समय तक कानून से बचता रहा। पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी दस्तावेजों के सहारे आंध्र प्रदेश में सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन हालिया खुफिया जानकारी और तकनीकी निगरानी के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रेस कर विशेष टीम ने उसे धर दबोचा। पुलिस जांच में सामने आया है कि 11 अक्टूबर 1997 की रात दंडुपाल्या गैंग के सदस्यों ने मंगलुरु के उरवा थाना क्षेत्र अंतर्गत मरिगुडी क्रॉस के पास एक घर में घुसकर दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम दिया था।
बदमाशों ने 80 वर्षीय लुईस डी’मेलो और 19 वर्षीय रंजीत वेगास की बेरहमी से हत्या कर दी थी और वारदात के बाद घर से सोने के गहने लूटकर फरार हो गए थे। इस सनसनीखेज मामले ने उस समय पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी और पुलिस ने दंडुपाल्या गैंग के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था।
इस केस में पुलिस पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी और वर्ष 2010 में बेंगलुरु की विशेष सत्र अदालत ने गैंग लीडर समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया था, लेकिन आरोपी नंबर-6 तब से फरार चल रहा था।
उसके खिलाफ वारंट जारी किया गया था, फिर भी वह लगातार अपनी पहचान बदलकर गिरफ्तारी से बचता रहा। पुलिस का कहना है कि आरोपी कर्नाटक के विभिन्न जिलों में करीब 13 हत्या और लूट के मामलों में शामिल रहा है, जिनकी विस्तृत जांच अभी जारी है।
मंगलुरु पुलिस के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी अंततः न्याय से नहीं बच सकता। फिलहाल आरोपी को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, वहीं पुलिस उससे पूछताछ कर अन्य लंबित मामलों और नेटवर्क से जुड़े तथ्यों को खंगालने में जुटी हुई है।



