आम जनता आज के समय में सरकार की ओर टकटकी लगाए देख रही है कि उसे महंगाई की मार से राहत मिलेगी, लेकिन महंगाई से राहत तो दूर उल्टा दैनिक उपभोग से लेकर जरूरी सामानों के दाम में आए दिन बढ़ोतरी होते दिखाई दे रही है। महंगाई से आज जनता बेहद परेशान है। लेकिन इस बीच आम जनता के लिए एक राहत भरी खबर है। दरअसल सरकार के पास ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी ईंधन के दाम में कटौती करने का प्रस्ताव दिया है। बताया जा रहा है कि आगामी दिनों में डीजल के कीमतों में 10 रुपए से ज्यादा की कटौती देखने को मिल सकती है। वहीं, पेट्रोल के भी रेट में भी कमी आने की उम्मीद है।
12 रुपए तक सस्ता हो सकता है डीजल
मिली जानकारी के अनुसार ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी ने पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के पास हाई स्पीड डीजल के रेट में 11.70 रुपए, लाइट डीज़ल ऑयल की कीमत में 10.01 रुपए और पेट्रोल के दाम में .36 रुपए कटौती करने का प्रस्ताव पेश किया है। बताया जा रहा है कि ओगरा ने ये प्रस्ताव अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के बाद पेश किया है। अगर सरकार ओगरा के इस प्रस्ताव पर मुहर लगाती है तो 16़ दिसंबर से जनता को बड़ी राहत मिल सकती है।
पेट्रोल के दाम में भी कटौती संभव
सरकार अगर इस प्रस्ताव को पास करती है तो पेट्रोल की नई कीमत 263.09 रुपए प्रति लीटर होगी। जबकि हाई-स्पीड डीज़ल 267.80 रुपए प्रति लीटर में उपलब्ध होगा। वहीं, केरोसिन ऑयल की कीमत घटकर 181.16 रुपए प्रति लीटर और लाइट डीज़ल ऑयल 153.76 रुपए प्रति लीटर होने की उम्मीद है। इन संभावित कीमत कटौतियों से महंगाई से जूझ रहे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
16 दिसंबर से लागू हो जाएंगे नए रेट
ज्ञात हो कि इससे पहले, 30 नवंबर को सरकार ने 15 दिसंबर तक की अवधि के लिए ईंधन की कीमतों में 4.79 रुपए प्रति लीटर तक की कटौती की थी। पेट्रोलियम डिवीजन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में 2 रुपए की कमी कर इसे 263.45 रुपए प्रति लीटर किया गया था, जबकि हाई-स्पीड डीज़ल की कीमत 4.79 रुपए घटाकर 279.65 रुपए प्रति लीटर कर दी गई थी।
बता दें कि हाई-स्पीड डीज़ल का उपयोग बड़े पैमाने पर परिवहन और कृषि क्षेत्रों में किया जाता है, इसलिए इसकी कीमत में कमी का व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ता है। वहीं, पेट्रोल का उपयोग मुख्य रूप से मोटरसाइकिलों और कारों में होता है और सीएनजी स्टेशनों पर स्वदेशी गैस के उपयोग पर प्रतिबंध के कारण पंजाब में इसकी खपत सबसे अधिक है।
