प्रभावित यात्रियों को पूरा मुआवजा देने के निर्देश
नई दिल्ली,10 दिसंबर । दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को इंडिगो एयरलाइंस में चल रहे परिचालन संकट पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने लगातार बढ़ रही फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी को “गंभीर स्थिति” बताते हुए केंद्र सरकार और डीजीसीए से पूछा कि हालात इतने खराब कैसे हो गए।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि रद्द उड़ानों के कारण यात्रियों को परेशानी के साथ आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब इंडिगो की उड़ानें बंद थीं, तो दूसरी एयरलाइंस ने टिकटों के दाम कई गुना क्यों बढ़ा दिए। अदालत ने इसे “अवसरवाद” करार देते हुए पूछा कि चार-पांच हजार में मिलने वाले टिकट 35-40 हजार तक कैसे पहुंच गए।
हाईकोर्ट ने कहा कि संशोधित एफडीटीएल नियम लागू करने में देरी और निगरानी की कमी के कारण देशभर में दो हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं और चालीस हजार से अधिक यात्री फंस गए। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने टिप्पणी की कि पायलटों की थकान सीधे सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है और नियामकों को समय रहते कदम उठाने चाहिए थे।
कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि सभी प्रभावित यात्रियों को डीजीसीए के मौजूदा दिशा-निर्देशों और भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत पूरा मुआवजा दिया जाए। अदालत ने कहा कि मुआवजे में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं होगी। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि इंडिगो को शो-कॉज नोटिस जारी कर दिया गया है और एयरलाइन ने अपनी गलती मानते हुए स्थिति सुधारने का भरोसा दिया है।
नौवें दिन भी नहीं थमा संकट
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पिछले नौ दिनों से गंभीर परिचालन गड़बड़ियों से जूझ रही है। रोजाना करीब 2300 उड़ानें संचालित करने वाली और घरेलू बाजार में 60% हिस्सेदारी रखने वाली इस एयरलाइन का मार्केट कैप संकट की वजह से लगभग 21,000 करोड़ रुपये घट चुका है।
दिल्ली, अहमदाबाद और मुंबई जैसे प्रमुख एयरपोर्ट पर मंगलवार को भी बड़ी संख्या में यात्री फंसे नजर आए। कई उड़ानें अचानक रद्द होने या भारी देरी से चलने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कुछ यात्रियों ने खाने-पीने और सही जानकारी न मिलने की शिकायत भी की। संकट कब खत्म होगा, इस पर अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है।



