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Health Tips: पौष माह में कैसी रहे दिनचर्या और खान-पान, नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताए महत्वपूर्ण सूत्र

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कोरबा, 07 दिसंबर (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने पौष (पूस) मास में अपनाए जाने वाले आहार-विहार के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की हैं। हिंदी मासानुसार पौष माह 06 दिसंबर 2025 से आरंभ होकर 03 जनवरी 2026 तक रहेगा। आयुर्वेद के अनुसार हर माह और ऋतु के अनुसार खान-पान और जीवनशैली का पालन करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि पौष मास हेमंत ऋतु का अंतिम महीना होता है। इस दौरान हवाएँ अत्यधिक ठंडी हो जाती हैं और वातावरण में कोहरा बना रहता है। वर्ष का सबसे छोटा दिन 21 दिसंबर भी इसी माह में पड़ता है। इस मौसम में कफ का संचय तथा वात दोष का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे संधिशूल, संधिशोथ, श्वास-कास, जुकाम, ज्वर और त्वचा संबंधी रोगों की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।

उन्होंने बताया कि इस अवधि में गुरु एवं स्निग्ध आहार का सेवन करना अत्यंत लाभकारी होता है। मधुर, अम्ल और लवण रस से युक्त पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। वहीं कटु, तिक्त और कषाय रस वाले आहार तथा अत्यधिक ठंडे, लघु और रुक्ष खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए।

डॉ. शर्मा ने विशेष रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि पौष माह में धनिये का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ बढ़ सकती हैं। इसके स्थान पर अजवाइन, अदरक और लौंग का उपयोग लाभकारी है। वहीं चीनी की जगह गुड़ का सेवन करने की सलाह दी गई है।

उन्होंने बताया कि इस मौसम में दूध और मेवे (ड्राई फ्रूट्स) शक्ति को बढ़ाते हैं और शरीर में ऊष्मा बनाए रखते हैं। हेमंत ऋतु को शक्ति संचय की ऋतु कहा गया है, इसलिए च्यवनप्राश, अश्वगंधा पाक, बादाम पाक, शतावर, आंवला, विदारीकंद, अकरकरा और गोंद के लड्डुओं जैसे आयुर्वेदिक रसायनों का सेवन नियमानुसार करने से वर्षभर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

आहार के संदर्भ में उन्होंने कहा कि गेहूं, चावल, जौ, तिल, दूध, मेवा, गुड़, अजवाइन, लौंग और अदरक का सेवन पौष माह में अत्यंत हितकारी है। वहीं मांस-मदिरा, बैंगन, मूली, मसूर, फूलगोभी, उड़द की दाल, चीनी और तले भोजन से बचना चाहिए।

जीवनशैली की बात करते हुए डॉ. शर्मा ने अभ्यंग (तेल से मालिश), स्निग्ध उबटन, आतप स्नान (धूप सेवन) और हल्के गुनगुने पानी से स्नान को लाभकारी बताया। मौसम अनुसार शरीर को ढककर रखना और यथाशक्ति व्यायाम करना भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस माह में दिन में सोना, रात्रि में जागरण करना, बेसमय स्नान तथा तीव्र ठंडी हवाओं के संपर्क में आना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने लोगों से अपील की है कि पौष माह की प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेदिक दिनचर्या अपनाएँ और पूरे साल स्वस्थ रहने की दिशा में कदम बढ़ाएँ।

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