एयरलाइंस को सीमा से अधिक शुल्क न लेने का आदेश
नई दिल्ली,06 दिसंबर । इंडिगो में चल रही परिचालन समस्याओं ने देश के विमानन क्षेत्र को हिला दिया है। लगातार पांच दिनों से उड़ानें रद्द होने का सिलसिला जारी है, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालात तब और बिगड़ गए जब कई एयरलाइंस ने अचानक किराया बढ़ा दिया। इसी बढ़ोतरी को गंभीरता से लेते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शनिवार को सभी एयरलाइंस को सख्त निर्देश जारी किए।
सरकार ने क्यों लिया मामला गंभीरता से
बीते पांच दिनों में इंडिगो दो हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द कर चुकी है। देश के घरेलू विमानन बाजार में इंडिगो की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है। इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने का सीधा असर बाकी एयरलाइंस पर पड़ा। सीटों की उपलब्धता कम हुई और किराए कई रूट्स पर अचानक बढ़ गए। यात्रियों ने इसे लेकर शिकायतें दर्ज कराईं, जिन पर मंत्रालय ने त्वरित कार्रवाई की।
एयरलाइंस से कहा: तय सीमा के बाहर किराया न लें
सरकार ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी एयरलाइन निर्धारित किराया सीमा से अधिक शुल्क नहीं ले सकती। जिन रूट्स पर मांग बढ़ी है, वहां भी किराए की ऊपरी सीमा बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्रालय ने संकेत दिया कि स्थिति सामान्य होने तक यह नियंत्रण जारी रहेगा। निर्देश का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मौजूदा संकट को देखते हुए कोई भी कंपनी मुनाफाखोरी न करे।
मुनाफाखोरी रोकने के लिए नियामक शक्तियों का इस्तेमाल
मंत्रालय ने बताया कि उसने सभी प्रभावित मार्गों पर किराया नियंत्रित करने के लिए अपनी नियामक शक्तियों का इस्तेमाल किया है। इस कदम का सीधा उद्देश्य है कि किराया वाजिब और व्यावहारिक रहे, चाहे उड़ानें कम क्यों न हों। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी एयरलाइन द्वारा सीमा से अधिक किराया वसूला जाता है तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
संवेदनशील यात्रियों का ध्यान
सरकार ने कहा कि इस संकट में ऐसे कई यात्री भी शामिल हैं जिन्हें तुरंत यात्रा करनी होती है। इनमें वरिष्ठ नागरिक, छात्र, मरीज और उनके परिजन शामिल हैं। मंत्रालय का कहना है कि किराया नियंत्रण इसलिए भी जरूरी है ताकि कोई भी जरूरतमंद यात्री आर्थिक दबाव में न आए और आवश्यक यात्रा कर सके।
विमानन क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण समय
इंडिगो की उड़ानों पर असर ने देश के विमानन बाजार की कमियों को फिर उजागर कर दिया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि एक बड़ी एयरलाइन के संचालन पर असर पूरे सेक्टर में असंतुलन पैदा कर देता है। फिलहाल सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और एयरलाइंस से लगातार रिपोर्ट तलब कर रही है।
