Vedant Samachar

IND vs SA 3rd ODI: टीम इंडिया पर मंडरा रहा 39 साल पुराना खतरा, विशाखापट्टनम में अब इज्जत दांव पर

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नई दिल्ली,06 दिसंबर : करीब 25 साल बाद साउथ अफ्रीका के हाथों घर में टेस्ट सीरीज गंवाने के बाद भारतीय टीम के सामने अब एक नई चुनौती है. शनिवार 6 दिसंबर को वनडे सीरीज का तीसरा और आखिरी मैच खेला जाएगा. पहले मैच में भारत और दूसरे मैच में साउथ अफ्रीका की जीत के बाद सीरीज 1-1 की बराबरी पर है. अब सीरीज काप फैसला विशाखापट्टनम में होना है, जहां जीतने वाली टीम ट्रॉफी पर कब्जा करेगी. ऐसे में चुनौती तो दोनों टीम के लिए बराबरी की है लेकिन टीम इंडिया के सामने इज्जत बचाने की चुनौती है क्योंकि उस पर 39 साल पुराना इतिहास दोहराने का खतरा मंडरा रहा है.

क्या है ये इतिहास और क्यों ये एक बड़ी चुनौती है, इसके बारे में आपको आगे बताते हैं. पहले सीरीज के अब तक के सफर पर नजर डाल लेते हैं. इस सीरीज में अभी तक दोनों मैच हाई-स्कोरिंग रहे और हर पारी में 330 रन से ज्यादा का ही स्कोर बना है. रांची में खेले गए पहले वनडे में भारत ने 349 रन बनाए थे और साउथ अफ्रीका को 332 रन पर ढेर कर 17 रन से मैच जीता था. मगर रायपुर में खेले गए दूसरे मैच में 358 रन बनाने के बावजूद भारतीय टीम ये स्कोर डिफेंड नहीं कर सकी और साउथ अफ्रीका ने 4 विकेट से मैच जीता.

दूसरे मैच में जीत के साथ ही साउथ अफ्रीका ने सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली और अब फैसले की घड़ी आ गई है. टेस्ट सीरीज में 0-2 से हार की शर्मिंदगी झेलने के बाद टीम इंडिया वनडे सीरीज जीत कर थोड़ी बहुत भरपाई करना चाहेगी. मगर उससे भी बड़ी चुनौती ये है कि 39 साल से चले आ रहे सफल सिलसिले को कैसे बचाया जाए. असल में बीते 39 साल में टीम इंडिया घर में एक ही टीम के खिलाफ टेस्ट और वनडे सीरीज नहीं हारी है. आखिरी बार 1986-87 में पाकिस्तानी टीम ने भारत दौरे पर आकर 1-0 से टेस्ट और 5-1 से वनडे सीरीज जीती थी.

साउथ अफ्रीका ने भारत को टेस्ट में तो हरा दिया है, अब उसके पास पाकिस्तान वाला ऐतिहासिक कमाल दोहराने का मौका है. वहीं टीम इंडिया के सामने अपनी इज्जत बचाने का आखिरी मौका है. टीम इंडिया के लिए ये चुनौतीपूर्ण इसलिए भी होने वाला है क्योंकि इस सीरीज में अभी तक ओस का बहुत असर पड़ा है और दूसरी पारी में स्कोर डिफेंड करना बहुत मुश्किल हो रहा है. वहीं टीम इंडिया पिछले लगातार 20 वनडे मैच में टॉस हार गई है और इस बार भी वो जीतेगी, ये कहना मुश्किल है. ऐसे में राहुल एंड कंपनी को अपना पूरा जोर लगाना पड़ेगा.

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