Vedant Samachar

साउथ सिनेमा का वो सितारा जिसे ‘चार्लिन चैपलिन ऑफ इंडिया’ का मिला था टैग, जेल में बिताने पड़े थे 30 महीने, 150 फिल्मों में किया काम

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मुंबई : साउथ सिनेमा की दुनिया में कई कलाकार आए और गए, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जो इतिहास में कभी मिटते नहीं. उन्हीं में से एक हैं एन एस कृष्णन (N. S. Krishnan) वो कलाकार जिन्हें लोग प्यार से ‘भारत का चार्ली चैपलिन‘ कहते हैं. उनकी कॉमेडी, उनकी मासूम अदाएं और फिल्मों में छिपे सामाजिक संदेश आज भी लोगों को याद हैं. 29 नवंबर 1908 को जन्में NSK ने अपनी जिंदगी में जितने संघर्ष देखे, उतनी ही बड़ी सफलता हासिल की.

एन एस कृष्णन की कला की शुरुआत मंच से हुई. वो शुरू-शुरू में लोक-कला विलुपाट्टू के कलाकार थे, फिर थिएटर की तरफ बढ़े. मंच पर उनका ह्यूमर इतना जबरदस्त होता था कि लोग उनकी प्रस्तुति देखने भीड़ लगाकर आते थे. धीरे-धीरे फिल्मों का दौर आया और साल 1935 में उनकी पहली फिल्म ‘मेनका‘ रिलीज हुई. फिल्म हिट रही और एन एस कृष्णन रातों-रात बड़े सितारे बन गए. इसके बाद तो जैसे उनका समय ही बदल गया. लगभग 150 से ज्यादा तमिल फिल्मों में काम करके उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग का इतना ऊंचा स्तर खड़ा कर दिया, जिसे आज भी लोग मिसाल के रूप में लेते हैं.

‘चार्ली चैपलिन ऑफ इंडिया’
उनकी कॉमेडी सिर्फ हंसाने के लिए नहीं होती थी, उसमें समाज के लिए एक संदेश भी होता था. यही वजह है कि लोग उन्हें सिर्फ कॉमेडियन नहीं, बल्कि एक सोच वाले कलाकार के रूप में देखते थे. इसी वजह से उन्हें ‘चार्ली चैपलिन ऑफ इंडिया‘ कहा जाने लगा. उनकी पत्नी टी ए माधुरम के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन जोड़ी भी काफी पॉपुलर थी और दोनों ने कई सुपरहिट फिल्में दीं. लेकिन, NSK की जिंदगी सिर्फ चमक और शोहरत से भरी नहीं थी. एक वक्त ऐसा भी आया जब वो एक हत्या के मामले में फंस गए.

30 महीने की हुई थी जेल
जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मीकांथन मर्डर केस में उन्हें लगभग 30 महीने जेल में रहना पड़ा. यह समय उनके लिए बेहद मुश्किल था, करियर पर भी असर पड़ा और निजी जिंदगी पर भी. लेकिन, NSK हार मानने वाले नहीं थे. बरी होने के बाद वे फिर से फिल्मों में लौटे और अपनी कॉमेडी से दर्शकों को एक बार फिर हंसाया. जेल से वापसी के बाद उनकी फिल्म रिलीज हुई जिसने साबित कर दिया कि NSK की लोकप्रियता कम नहीं हुई है. लोग आज भी उन्हें तमिल सिनेमा के क्लासिक कॉमेडियन के रूप में याद करते हैं.

सामाजिक मुद्दों पर उनके तंज, उनके गाने, उनके डायलॉग, सब उनकी सोच और कला की गहराई को दिखाते हैं. 30 अगस्त 1957 को NSK दुनिया से विदा हो गए, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है.

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