कवर्धा, 27 नवंबर (वेदांत समाचार)। पुलिस विभाग की गरिमा, अनुशासन और जिम्मेदार कार्यप्रणाली को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कबीरधाम पुलिस ने कड़ा कदम उठाया है। ड्यूटी के दौरान नशा करने और लगातार अनुशासनहीनता में लिप्त तीन आरक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर विभाग ने सख्त संदेश दिया है कि पुलिस बल में लापरवाही और गैरजिम्मेदारी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।
पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के निर्देश पर की गई विभागीय जांच के बाद यह कार्रवाई की गई। जांच में मिले साक्ष्य, शिकायतें और पूर्व दंडों के आधार पर तीनों आरक्षकों के आचरण को सेवा के योग्य नहीं पाया गया।
आरक्षक 52 अनिल मिरज: 334 दिन की गैरहाजिरी और 22 बार दंडित होने का रिकॉर्ड
जांच में सामने आया कि आरक्षक अनिल मिरज लंबे समय से ड्यूटी से बिना सूचना अनुपस्थित रहने की आदत में लिप्त था। वह 334 दिनों तक बिना अवकाश स्वीकृति के गायब रहा। इसके अलावा मोटर वारंट गुम करना, नोटिस तामील में लापरवाही और 22 बार कार्रवाई के बाद भी व्यवहार में कोई सुधार न होना गंभीर अनुशासनहीनता के रूप में दर्ज किया गया। विभाग ने माना कि उनका लगातार गैरजिम्मेदार रवैया पुलिस अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा था।
आरक्षक 517 आदित्य तिवारी: बंदी पेशी के दौरान शराब पीकर सो जाना और 91 दिन अनुपस्थिति
आरक्षक आदित्य तिवारी के मामले को विभाग ने और गंभीर बताया। बंदी पेशी जैसे संवेदनशील दायित्व के दौरान वह शराब पीकर न्यायालय परिसर के बाहर ही सो गया। इस घटना से सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हुए। इसके बाद ड्यूटी छोड़कर फरार हो जाना और 91 दिनों की अनुपस्थिति ने स्थिति को और खराब कर दिया। पूर्व में भी कई बार ड्यूटी के दौरान शराब सेवन और गैरहाजिरी के लिए दंडित होने के बावजूद सुधार न होने पर विभाग ने उन्हें सेवा से पृथक कर दिया।
आरक्षक चालक 272 राजेश उपाध्याय: पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ही नशे में हंगामा
आरक्षक राजेश उपाध्याय का मामला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ही सामने आया। आमद दर्ज कराने पहुंचे उपाध्याय नशे की हालत में पाए गए। गणवेश अव्यवस्थित होने के साथ अनर्गल बातचीत करना और कार्यालय कर्मियों से बहस करना पुलिस नियमों का खुला उल्लंघन पाया गया। पूर्व में कई बार दंडित होने के बाद भी सुधार न होने पर विभाग ने उन्हें भी सेवा से अलग करने का निर्णय लिया।
कबीरधाम पुलिस ने आदेश में स्पष्ट किया कि तीनों आरक्षकों के आचरण से पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा है और जनता में नकारात्मक संदेश गया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि बल की गरिमा बनाए रखना सर्वोपरि है, और अनियमितता व नशाखोरी जैसी प्रवृत्तियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कार्रवाई को विभाग ने अनुशासन की नई रेखा के रूप में माना है, जिससे अन्य कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश गया है कि पुलिस सेवा में लापरवाही की कोई जगह नहीं है।



