Vedant Samachar

1188 शिक्षकों की याचिकाएं खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- ‘संविलयन से पहले शिक्षा विभाग में नहीं थे शिक्षाकर्मी, इसलिए क्रमोन्न्ति के लिए पात्र नहीं’

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बिलासपुर,26नवंबर (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 10 साल सेवा अवधि के बाद शिक्षकों की क्रमोन्नति की मांग वाली 1188 याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस एनके व्यास ने अपने फैसले में कहा है कि संविलयन से पहले शिक्षाकर्मी स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन नहीं थे। इसलिए उन्हें क्रमोन्नति पाने की पात्रता नहीं है।

दरअसल, पंचायत विभाग में नियुक्त शिक्षाकर्मी ग्रेड-3, 2 और 1 का शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया। इसके बाद उन्हें सहायक शिक्षक (एलबी), शिक्षक (एलबी) और व्याख्याता (एलबी) पदनाम दिया गया। लेकिन, इन शिक्षकों को क्रमोन्नति का लाभ नहीं दिया गया, जिस पर प्रदेश भर के 1188 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं लगाई।

इसमें कहा गया कि वे 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद क्रमोन्नति के हकदार हैं। लेकिन विभाग ने 2017 का वह आदेश लागू नहीं किया, जिसमें 10 साल बाद वेतनवृद्धि (क्रमोन्नति) देने की बात कही गई थी। शिक्षकों ने सोना साहू के मामले में हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के फैसले के आधार पर क्रमोन्नति का लाभ देने की मांग की थी।

संविलियन से पहले शासकीय सेवक नहीं थे

इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से बताया गया कि याचिकाकर्ता शिक्षाकर्मी ग्रेड-3/ सहायक शिक्षक (पंचायत) के रूप में पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत नियुक्त हुए थे और उनकी सेवा व नियंत्रण जनपद पंचायत के अधीन था। ऐसे में उन्हें संविलियन से पहले राज्य शासन का नियमित सरकारी सेवक नहीं माना जा सकता।

वे क्रमोन्नति देने के लिए 10 मार्च 2017 को जारी सर्कुलर के आवश्यक मानदंड पूरी नहीं करते, क्योंकि उनकी सेवा अवधि की गणना केवल 1 जुलाई 2018 यानी संविलियन की तारीख से ही की जा सकती है। इसी के चलते वे 10 वर्ष की अनिवार्य योग्यता पूरी ही नहीं करते। हाईकोर्ट ने शासन के इन तर्कों को सही माना है।

संविलयन नीति में स्पष्ट है किसी भी लाभ का दावा नहीं किया जा सकता

याचिकाकर्ताओं ने अपने पक्ष में सोना साहू मामले का हवाला दिया था। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सोना साहू केस के तथ्य पूरी तरह अलग है, इसलिए समानता का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि संविलियन नीति 30 जून 2018 में स्पष्ट है कि पूर्व शिक्षाकर्मी केवल संविलियन की तारीख से ही शासकीय शिक्षक माने जाएंगे और उससे पहले के किसी भी लाभ, वेतन वृद्धि या क्रमोन्नति का दावा नहीं किया जा सकता।

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