चंद्र शेखऱ शर्मा
अस्थिरोग विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, गर्भस्त शिशु के लिए भी खरनाक है ब्रेकर
ब्रेकर हादसों को न्यौता दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे पड़ा है
कोर्ट के आदेश, कानून की गरिमा, और जनता की सुरक्षा तीनों ताक पर रख दिए गए हैं
कवर्धा 23 नवंबर 2025 (वेदांत समाचार)। कबीरधाम जिला मुख्यालय सहित जिले भर में सड़कों पर बने अमानक गति-रोधक (स्पीड ब्रेकर) लोगों की रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। बिना किसी मानक के, ऊँचे-नीचे और अचानक दिखाई देने वाले ये ब्रेकर वाहन चालक व सवार को झटके के साथ उछाल देते हैं, जिसके कारण स्पाइन इंजरी के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। दूसरी ओर गर्भवती महिलाओं के लिए भी ब्रेकर जानलेवा साबित हो रहे । ब्रेकर में गाड़ियों के उछलने और झटके लगने सारः गर्भ को भी खतरा हो सकता है बावजूद इसकर हाईकोर्ट की गाइड लाइन व आदेश के विपरीत प्रमुख सड़को , राज्य मार्ग व नगर की गलियां अमानक बेतरतीब ब्रेकरों से पाट दिया गया है ।
शहर के प्रमुख अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल जैन ने बताया कि , “अमानक ब्रेकर सबसे ज्यादा खतरनाक दोपहिया सवारों और बुज़ुर्गों के लिए हैं। अचानक लगने वाले तेज़ झटकों व उछलने से सर्वाइकल स्पाइन (गर्दन की रीढ़ की हड्डी ), लम्बर स्पाइन (कमर की रीढ़ की हड्डी ) और गर्दन व कमर की बैक मसल्स पर अत्यधिक दबाव पड़ता है गठिया के मरीजों में दर्द बढ़ जाता है। इससे डिस्क प्रोलैप्स, नस दबना, सायटिका और दीर्घकालिक कमर दर्द जैसी जटिल समस्याएँ बढ़ रही हैं। कई बार पीड़ित को ऑपरेशन तक कराने की नौबत आ रही , गंभीर चोट आने पर लकवा की शिकायत भी हो सकती है ।”
डॉ. जैन के अनुसार, पिछले कुछ सालों से रीढ़ की हड्डी की चोट व रीढ़ की हड्डी के L4,L5 में स्लिपडिस्क के मामलों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, जिनका कारण सड़क के गलत ढंग से बनाए गए ब्रेकर हैं।
शहर की प्रमुख स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ श्रीमती रानी संगीत जैनका ब्रेकर को लेकर कहना है कि गर्भावस्था ले दौरान ब्रेकर में अचानक गाड़ी के उछलने या झटके लगने से गर्भ में बच्चे को चोट लग सकती है जो जच्चा और बच्चा दोनो के जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है । ब्रेकर में गाड़ी चलाते समय गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी जरूरी है ।
नागरिक सतीश कुमार का कहना है कि कई क्षेत्रों में रात के समय ब्रेकर दिखाई भी नहीं देते, क्योंकि उन पर सफेद पट्टी या चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए गए है जिससे अचानक ब्रेकर आने से बाइक का संतुलन बिगड़ जाता है और गिरने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही है । विगत दिनों डॉ मिश्रा हॉस्पिटल के सामने ओला सवार गिर गया जिससे उसकी गाड़ी डैमेज हो गई और सवार को भी चोट आई हैं।
चारपहिया वाहन चालक हेमंत ने कहा कि मानक ब्रेकर होने से हमें भी दिक्कत नहीं होती, लेकिन शहर में बने ब्रेकर के न तो ऊँचाई-चौड़ाई का कोई मानक है, न ही कोई चेतावनी संकेत बिना पेंट पट्टी के ये स्पीड ब्रेकर रात के समय तो बिल्कुल दिखाई नहीं देते, जिससे अचानक ब्रेक लगाने पर वाहन असंतुलित हो जाते हैं। लोग रोजाना गिर रहे है । गाड़ियां डैमेज हो रही सो अलग ।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इन ब्रेकरों के कारण आए दिन वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और हादसों भी हो रहे गंभीर हादसों की आशंका बनी रहती है। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेशों के पालन हेतु संबंधित विभागों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये ब्रेकर हादसों को न्यौता दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे पड़ा है।कोर्ट के आदेश, कानून की गरिमा, और जनता की सुरक्षा तीनों ताक पर रख दिए गए हैं। क्या प्रशासन की ये मनमानी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है? सवाल उठ रहे हैं… जवाब देगा कौन ?



